मामला आगरा के एक नामी चांदी कारोबारी का है। इन भाई साहब की धर्मपत्नी ने पहले तो इन पर 'घरेलू हिंसा' (Domestic Violence) का गंभीर केस ठोक रखा था।
और कानून की मदद से बकायदा हर महीने कोर्ट से ₹30,000 जेब खर्च (गुजारा भत्ता) भी वसूल रही थीं।
पति बेचारा चुपचाप कानून का सम्मान करते हुए पैसे चुका रहा था। लेकिन एक दिन पत्नी साहिबा घर से यह कहकर निकलीं कि वो अपनी सहेली के पास जा रही हैं।
मगर पति के मन में शक की घंटी पहले ही बज चुकी थी, उन्होंने इस बार चुपचाप पत्नी का पीछा करने का फैसला किया।
पत्नी ने अपनी ही मासूम बेटी को सहेली के पास छोड़ा और खुद सीधे एक आलीशान होटल पहुंच गईं। पति भी साए की तरह पीछे-पीछे लगा हुआ था।
जैसे ही पत्नी होटल के कमरे में अपने 'खास दोस्त' के साथ दाखिल हुईं, पति ने मौके पर पहुंचकर दोनों को रंगे हाथों धर दबोचा! रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद होटल के कमरे में जो ड्रामा हुआ, उसने सारे पारिवारिक दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दीं।
फिलहाल मामला पुलिस के पास पहुंच चुका है और जांच जारी है।
यह सिर्फ एक पति-पत्नी के धोखे की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे सिस्टम और कानून के दुरुपयोग पर एक बहुत बड़ा तमाचा है।
जिस कानून को महिलाओं की सुरक्षा के लिए 'ब्रह्मास्त्र' बनाया गया था, उसे कुछ लोग इस कदर खिलौना बना चुके हैं कि पहले पति पर झूठा केस करो।
फिर गुजारा भत्ते के नाम पर उसकी गाढ़ी कमाई पर ऐश करो, और पीठ पीछे किसी और के साथ होटल का चक्कर चलाओ।
यह घटना साफ दिखाती है कि आज के दौर में शादियों से 'भरोसा' शब्द पूरी तरह डिलीट हो चुका है। जब कानून का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए नहीं।
बल्कि ब्लैकमेलिंग और अय्याशी के लिए होने लगे, तो समझ लीजिए कि समाज का 'मॉरल सिस्टम' पूरी तरह करैश हो चुका है!
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