पिता ने शर्त रखी थी ‘जो 2 तोले की नथ देगा, उसी से करूंगा बेटी की शादी’, पति ने प्यार में नथ को 5 तोले का कर दिया, लेकिन फिर सोना की जिंदगी में ऐसा दर्द आया कि सबकी आंखें खुल गईं


 “जो 2 तोले की नथ देगा, उसी से करूंगा अपनी बेटी सोना की शादी।”

सोना के पिता ने बेटी की शादी के लिए यही शर्त रखी थी।

कई रिश्ते आए, लेकिन कोई भी उनकी शर्त पूरी नहीं कर पाया। आखिरकार एक रिश्ता आया। लड़का ठेकेदारी का काम करता था और परिवार को रिश्ता पसंद आ गया।

लड़के के परिवार ने 2 तोले की सोने की नथ बनवाई और सोना को पहनाकर अपनी बहू बना लिया।

सोना भी बेहद खुश थी।

शादी के बाद जब भी वह किसी रिश्तेदार या सहेली से मिलने जाती, अपनी नथ को गर्व से दिखाती। सहेलियां उसकी तारीफ करतीं और आसपास के लोग कहते कि सोना बहुत संपन्न घर में ब्याहकर गई है।

लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद पति के कारोबार में अच्छा फायदा होने लगा।

पति ने खुशी में सोना की नथ में और सोना बढ़वा दिया।

सोना भी खुश हुई। उसे लगा कि पति अपनी तरक्की की खुशी उसके साथ बांट रहा है।

ससुराल वाले भी कहने लगे कि सोना के कदम बहुत शुभ हैं। जब से वह घर में आई है, बेटे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है।

जैसे-जैसे ठेकेदारी में फायदा बढ़ता गया, नथ भी बड़ी होती गई।

सोना के पिता भी गर्व से लोगों से कहते कि उन्होंने अपनी बेटी का रिश्ता कितने अच्छे घर में किया है।

लेकिन धीरे-धीरे सोना परेशान रहने लगी।

वजह कोई पारिवारिक झगड़ा नहीं था।

वजह थी उसकी नाक पर बढ़ता हुआ नथ का वजन।

नथ इतनी भारी होती जा रही थी कि घर के रोजमर्रा के काम करना उसके लिए मुश्किल होने लगा था।

इसी बीच सोना मां बन गई। उसका छोटा बेटा अब नन्हे हाथों से खेलते-खेलते मां की नथ पकड़ने लगा।

हर बार नथ खिंचती तो सोना की नाक में तेज दर्द होता।

एक दिन उसने परेशान होकर नथ उतार दी और उसकी जगह छोटी-सी नथुनी पहन ली।

लेकिन सास ने देखते ही नाराजगी जताई।

पति ने भी उसे समझाते हुए कहा—

“हमारी नाक कटवाना चाहती हो क्या? लोग क्या कहेंगे कि फलां की बहू इतनी छोटी नथ पहनती है?”

सोना डर गई और उसने फिर वही भारी नथ पहन ली।

फिर एक दिन उसका बच्चा खेलते-खेलते नथ पकड़ बैठा।

नन्हे हाथ से नथ खिंचते ही सोना की नाक बुरी तरह जख्मी हो गई और खून बहने लगा।

नथ बच्चे के हाथ में आ गई और वह उसे मासूमियत से देखने लगा।

पति तुरंत सोना को सुनार के पास लेकर गया। उसकी नाक का इलाज कराया गया और घाव ठीक होने में समय लगा।

लेकिन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ अभी बाकी था।

पति के कारोबार में एक और बड़ी सफलता मिली। अपनी कामयाबी की खुशी में उसने सोना की नथ में फिर सोना बढ़वा दिया।

अब वह नथ 5 तोले की हो चुकी थी।

पति ने खुशी से कहा कि दुनिया देखेगी कि उसने अपनी पत्नी को कितनी बड़ी नथ पहनाई है।

लेकिन सवाल यह है कि जिस चीज को परिवार अपनी इज्जत और पति की तरक्की की निशानी मान रहा था, क्या वही चीज सोना के लिए परेशानी और दर्द का कारण नहीं बन गई थी?

यह कहानी सिर्फ नथ की नहीं, बल्कि उस सोच की भी है जिसमें कई बार दिखावा, सामाजिक प्रतिष्ठा और लोगों की बातें किसी व्यक्ति की सुविधा और इच्छा से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

सोना की कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है—

क्या पत्नी की खुशी उसकी पसंद और आराम में है, या इस बात में कि लोग उसके गहनों को देखकर क्या कहेंगे?

क्या किसी महिला की नाक पर पहनी गई नथ परिवार की इज्जत तय कर सकती है?

और सबसे बड़ा सवाल—

अगर कोई गहना खूबसूरत दिखने के बावजूद दर्द देने लगे, तो क्या उसे सिर्फ समाज के डर से पहनते रहना चाहिए?

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