ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, आज 6 अगस्त 2026 को सावन के पावन महीने में राहु-केतु के उग्र गोचर प्रभाव से आकाशमंडल में एक संवेदनशील 'राहु-केतु छाया चक्र' सक्रिय हो चुका है।
सावन के इस पावन काल में राहु-केतु की कुदृष्टि 2 विशेष राशियों के जातकों पर भारी पड़ती दिख रही है। यदि इन राशि वालों ने सावन समाप्त होने (31 अगस्त) से पहले जरा सी भी लापरवाही, लालच या जल्दबाज़ी में फैसला लिया, तो अचानक भारी आर्थिक तंगी, कोर्ट-कचहरी के चक्कर, गुप्त शत्रुओं की साजिश और परिवार में भयंकर विवाद का सामना करना पड़ सकता है।
आइए जानते हैं कि राहु-केतु किन 2 राशियों पर क्रूर नजर बनाए हुए हैं और इस संकट से बचने के अचूक उपाय क्या हैं:
इन 2 राशियों पर राहु-केतु का संकट: देखें चेतावनी महा-राशिफल
1. कन्या राशि — व्यापार में बड़ा वित्तीय धोखा, पैसों की तंगी और कंगाली का भय
कन्या राशि के जातकों पर राहु-केतु का छाया प्रभाव गोचर भाव में बना हुआ है, जिससे वित्तीय मामलों में अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
राहु-केतु का छाया प्रभाव: शेयर बाजार, सट्टेबाज़ी या किसी नए अनजान व्यक्ति के लुभावने ऑफर में आकर बड़ा निवेश करना भारी पड़ सकता है। किसी पर अंधाधुंध भरोसा करने से बड़ा वित्तीय धोखा मिल सकता है। अवांछित और अचानक आए खर्चों के कारण बैंक बैलेंस तेजी से घट सकता है।
बचाव की सलाह: पैसों के किसी भी बड़े लेन-देन में लिखापढ़ी जरूर रखें, जोखिम भरे सौदों से दूर रहें और किसी को भी बड़ा उधार पैसा न दें।
2. मीन राशि — दफ्तर की गंदी राजनीति, अचानक बड़ा नुकसान और सेहत में भारी गिरावट
मीन राशि के जातकों को अपने कार्यक्षेत्र, पारिवारिक संबंधों और सेहत के प्रति बहुत सोच-समझकर कदम उठाने होंगे।
राहु-केतु का छाया प्रभाव: दफ्तर में गुप्त शत्रु आपके खिलाफ साजिश रच सकते हैं। आपके गुस्से या जल्दबाज़ी का फायदा उठाकर सहकर्मी अधिकारियों के सामने आपकी छवि खराब करने का प्रयास करेंगे। अनिद्रा, सिरदर्द, पेट से जुड़ी समस्याएं या वाहन चलाते समय चोट लगने का डर बना हुआ है।
बचाव की सलाह: किसी भी कानूनी या वित्तीय दस्तावेज़ पर बिना पढ़े दस्तखत न करें, दफ्तर की गपशप से दूर रहें और वाहन धीमी गति से चलाएं।
सावन में राहु-केतु की क्रूर नजर से बचने के 3 अचूक उपाय
सावन के पावन महीने में राहु-केतु के दुष्प्रभावों को शांत करने और संकटमोचन महादेव व बजरंगबली का सुरक्षा कवच पाने के लिए ये शास्त्रीय उपाय तुरंत शुरू करें:
शिवलिंग पर जल, काले तिल और कुश अर्पण: भगवान शिव की पूजा से राहु-केतु का अशुभ प्रभाव तुरंत निष्प्रभावी हो जाता है। सावन में प्रतिदिन सुबह तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें थोड़े काले तिल और कुश मिलाएं। इसे शिवलिंग पर अर्पित करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का 108 बार पाठ करें।
भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक और 'ॐ रां राहवे नमः' जाप: शनिवार या बुधवार की शाम को निकटतम भैरव मंदिर या पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शांत मन से 'ॐ रां राहवे नमः' और 'ॐ कें केतवे नमः' मंत्र का जाप करें।
सफाईकर्मियों को दान और पक्षियों को बाजरा: सावन के बचे हुए दिनों में किसी गरीब, मजदूर या सफाईकर्मी को लोहे के बर्तन, सिक्के या भोजन का दान करें। प्रतिदिन पक्षियों को सात तरह का अनाज (सप्तधान्य) या बाजरा डालें और पहली रोटी गौ माता को खिलाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. सावन के महीने में राहु-केतु के गुस्से से बचने के लिए शिव पूजा क्यों जरूरी है? Ans. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान शिव नवग्रहों के स्वामी और राहु-केतु के नियंत्रक हैं। सावन में जब जातक भोलेनाथ पर जल और काले तिल अर्पित करते हैं, तो राहु-केतु का छाया प्रभाव तुरंत समाप्त हो जाता है और जीवन में आ रहे अचानक संकट टल जाते हैं।
Q2. राहु-केतु के छाया प्रभाव वाली राशियों को 31 अगस्त से पहले क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए? Ans. इस अवधि में सट्टेबाज़ी/शॉर्टकट से पैसा कमाने के लालच में न आएं, किसी अनजान व्यक्ति पर वित्तीय भरोसा न करें, शराब या तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह छोड़ दें और किसी के साथ विश्वासघात न करें।
Comment Box में 'हर हर महादेव' या 'जय भैरव देव' जरूर लिखें, देवाधिदेव महादेव आपके सभी संकट दूर कर परिवार की रक्षा करेंगे!
अस्वीकरण (Disclaimer)
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं, पंचांग, सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। हर व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति, महादशा, अंतर्दशा और वर्तमान गोचर का प्रभाव अलग हो सकता है, इसलिए किसी भी नतीजे पर पहुंचने या कोई भी बड़ा वित्तीय व व्यावहारिक निर्णय लेने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या योग्य ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
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