"पत्नी तहखाने में क्यों जाती थी?"
रोहित अपनी पत्नी मेघा और मां के साथ रहता था। उनका पुराना पुश्तैनी मकान शहर के बाहरी इलाके में था।
घर की सबसे अजीब जगह थी उसका पुराना तहखाना।
वह कई सालों से बंद पड़ा था।
रोहित की मां हमेशा कहती थीं—
"उस कमरे को मत खोलना। वहां पुराने सामान के अलावा कुछ नहीं है।"
रोहित ने कभी इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
लेकिन कुछ समय से उसने एक अजीब चीज देखनी शुरू कर दी।
जब भी वह रात की शिफ्ट में जाता, मेघा उसके जाने के बाद तहखाने की तरफ जाती।
एक रात रोहित ने पत्नी का पीछा किया
रात करीब 11 बजे रोहित काम पर जाने का नाटक करके घर से निकला।
लेकिन वह कुछ दूरी पर रुक गया।
करीब आधे घंटे बाद मेघा कमरे से बाहर निकली।
उसके हाथ में एक छोटी टॉर्च थी।
वह सीधे तहखाने की तरफ गई।
रोहित चुपचाप उसके पीछे पहुंचा।
मेघा ने दरवाजा खोला।
रोहित ने पहली बार देखा कि तहखाने का अंदरूनी कमरा बाहर से दिखने वाले कमरे से कहीं बड़ा था।
अंदर एक पुरानी अलमारी थी
मेघा ने अलमारी खोली।
उसमें कपड़े या सामान नहीं था।
बल्कि कई फाइलें थीं।
मेघा ने एक फाइल निकाली और उसे पढ़ने लगी।
रोहित ने पीछे से पूछा—
"तुम यहां क्या कर रही हो?"
मेघा बुरी तरह घबरा गई।
फाइल उसके हाथ से गिर गई।
रोहित ने फाइल उठाई।
पहले पन्ने पर उसके पिता का नाम लिखा था।
दस साल पुराना मामला फिर सामने आया
रोहित के पिता की मृत्यु करीब दस साल पहले हुई थी।
परिवार में कहा गया था कि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।
लेकिन फाइल में कुछ अलग ही जानकारी थी।
उसमें उनके कारोबार से जुड़े पुराने लेनदेन और कुछ लोगों के नाम दर्ज थे।
एक पन्ने पर लिखा था—
"अगर ये दस्तावेज सामने आए तो पूरा कारोबार खत्म हो जाएगा।"
रोहित ने मेघा की तरफ देखा।
"तुम्हें ये सब कब से पता है?"
मेघा ने सिर झुका लिया।
मेघा ने बताया असली कहानी
मेघा को शादी के कुछ समय बाद घर की पुरानी अलमारी में एक चिट्ठी मिली थी।
वह रोहित के पिता ने किसी भरोसेमंद व्यक्ति के नाम लिखी थी।
चिट्ठी में तहखाने का जिक्र था।
मेघा ने उस समय इसे ज्यादा महत्व नहीं दिया।
लेकिन कुछ महीने पहले उसे पुराने कागजों में एक बैंक रिकॉर्ड मिला।
उस रिकॉर्ड में कई संदिग्ध लेनदेन थे।
तब उसने तहखाने में जाकर पुराने दस्तावेज ढूंढने शुरू किए।
लेकिन मेघा अकेली नहीं थी
रोहित ने पूछा—
"ये सब तुम अकेले कर रही थी?"
मेघा ने कुछ सेकंड चुप रहने के बाद कहा—
"नहीं।"
उसने तहखाने के दूसरे कमरे की तरफ इशारा किया।
वहां एक आदमी बैठा था।
रोहित उसे देखकर चौंक गया।
वह समीर था।
रोहित का बचपन का दोस्त।
रोहित को लगा कि उसे सबसे बड़ा धोखा मिला है
उसने गुस्से में पूछा—
"तुम दोनों यहां क्या कर रहे हो?"
समीर ने कहा—
"पहले पूरी बात सुनो।"
रोहित ने कहा—
"मेरी पत्नी और मेरा दोस्त आधी रात मेरे घर के तहखाने में छिपकर मिल रहे हैं। इससे ज्यादा क्या सुनना है?"
समीर ने एक पुरानी फोटो उसके सामने रख दी।
फोटो में रोहित के पिता, समीर के पिता और एक तीसरा आदमी खड़ा था।
तीसरा आदमी कौन था?
वह रोहित के पिता का पुराना कारोबारी साझेदार महेंद्र था।
समीर ने बताया कि करीब दस साल पहले कारोबार में बड़ी रकम की हेराफेरी हुई थी।
रोहित के पिता ने इसकी जांच शुरू की थी।
लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी मृत्यु हो गई।
समीर के पिता ने उस समय मामले की जांच जारी रखने की कोशिश की थी।
लेकिन उन्हें भी धमकियां मिली थीं।
असली सबूत तहखाने में छिपाए गए थे
समीर ने बताया कि रोहित के पिता ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज तहखाने में छिपा दिए थे।
मेघा को उन्हीं दस्तावेजों के बारे में पता चला था।
लेकिन उन्हें डर था कि अगर ये कागज गलत व्यक्ति के हाथ लग गए तो सबूत गायब हो सकते हैं।
इसीलिए दोनों रात में चुपचाप दस्तावेज निकाल रहे थे।
तभी तहखाने के बाहर आवाज आई
तीनों चुप हो गए।
ऊपर से किसी के चलने की आवाज आ रही थी।
रोहित ने धीरे से दरवाजे की तरफ देखा।
दरवाजा अपने आप थोड़ा खुला।
बाहर कोई नहीं था।
लेकिन सीढ़ियों के पास एक पुराना मोबाइल पड़ा था।
रोहित ने मोबाइल उठाया।
उसमें एक रिकॉर्डिंग चल रही थी।
रिकॉर्डिंग में सुनाई दी उसके पिता की आवाज
आवाज पुरानी और थोड़ी अस्पष्ट थी।
लेकिन रोहित अपने पिता की आवाज पहचान गया।
रिकॉर्डिंग में वे कह रहे थे—
"अगर मेरे साथ कुछ हो जाए तो इन दस्तावेजों को पुलिस तक पहुंचाना।"
रोहित के चेहरे का रंग बदल गया।
उसने पहली बार सोचा—
क्या उसके पिता की मौत वास्तव में सामान्य थी?
पुलिस को बुलाया गया
मेघा ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
तहखाने से दस्तावेज, मोबाइल और रिकॉर्डिंग सुरक्षित की गई।
पुराने बैंक रिकॉर्ड मंगाए गए।
पुलिस ने महेंद्र और पुराने कारोबार से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू की।
लेकिन जांच में जल्दबाजी नहीं की गई
पुरानी रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों से वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले।
लेकिन सिर्फ रिकॉर्डिंग के आधार पर रोहित के पिता की मौत को हत्या कहना संभव नहीं था।
पुलिस ने पुराने मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की भी जांच शुरू की।
कुछ संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि हुई।
मामला गंभीर जरूर था, लेकिन मौत की वजह पर अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी था।
फिर सामने आया एक पुराना बैंक खाता
जांचकर्ताओं को ऐसा बैंक खाता मिला जिसमें रोहित के पिता की कंपनी से रकम भेजी गई थी।
उस खाते का संबंध महेंद्र के पुराने कारोबारी नेटवर्क से था।
कई वर्षों से निष्क्रिय इस खाते में कुछ ऐसे लेनदेन मिले जो पुराने रिकॉर्ड से मेल खाते थे।
अब जांच की दिशा साफ होने लगी।
रोहित को पत्नी पर किए शक का अफसोस हुआ
रोहित ने मेघा से कहा—
"मैंने सोचा था कि तुम मुझसे कुछ गलत छिपा रही हो।"
मेघा ने कहा—
"मैं गलत तरीके से छिपा रही थी, लेकिन मेरा मकसद तुम्हें धोखा देना नहीं था।"
समीर ने भी कहा—
"हम चाहते थे कि पहले पक्का सबूत मिल जाए।"
रोहित कुछ देर तक चुप रहा।
फिर उसने कहा—
"अगली बार मेरे बारे में फैसला करने से पहले मुझे सच बताना।"
अंत
रोहित को लगा था कि उसकी पत्नी रात के अंधेरे में किसी से छिपकर मिल रही है।
उसने उसका पीछा किया।
लेकिन पत्नी को तहखाने में देखकर जो शक पैदा हुआ...
वह एक पुराने अपराध के दस्तावेजों तक पहुंच गया।
तहखाने की अलमारी।
पुरानी फाइलें।
दस साल पुरानी रिकॉर्डिंग।
और उसके पिता की आखिरी चेतावनी।
इन सबने रोहित के सामने परिवार का ऐसा रहस्य खोल दिया, जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी था—
क्या रोहित के पिता की मौत सिर्फ एक हादसा थी, या उस पुराने कारोबार विवाद में कुछ और छिपा था?
जांच जारी रही।
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