"आधी रात पत्नी खेत में!"
दीपक अपनी पत्नी काजल और मां के साथ रहता था। शादी को करीब सात साल हो चुके थे। दीपक खेती के साथ छोटा ट्रैक्टर किराए पर चलाता था।
पिछले कुछ दिनों से काजल का व्यवहार बदला हुआ था।
वह रात में कई बार घर से बाहर निकलती।
पूछने पर कहती—
"आंगन में हवा लेने गई थी।"
दीपक ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
लेकिन एक रात करीब दो बजे उसकी नींद अचानक खुली।
बिस्तर पर काजल नहीं थी।
दीपक ने खिड़की से बाहर देखा
आंगन खाली था।
दरवाजा अंदर से खुला हुआ था।
दीपक बाहर आया।
दूर खेतों की तरफ उसे एक हल्की रोशनी दिखाई दी।
उसने गौर से देखा।
काजल हाथ में फावड़ा लेकर खेत की तरफ जा रही थी।
दीपक के मन में पहला ख्याल आया—
क्या वह किसी से मिलने जा रही है?
उसने बिना आवाज किए उसका पीछा किया।
खेत में काजल ने गड्ढा खोदना शुरू कर दिया
काजल खेत के एक सुनसान हिस्से में पहुंची।
वह लगातार जमीन खोदने लगी।
दीपक दूर एक पेड़ के पीछे छिपकर उसे देख रहा था।
करीब दस मिनट बाद काजल रुक गई।
उसने जमीन से कुछ निकालकर देखा।
वह एक पुराना लोहे का डिब्बा था।
दीपक यह देखकर और हैरान हो गया।
काजल ने डिब्बा खोला।
अंदर कुछ पुराने कागज और एक छोटी डायरी थी।
तभी पीछे से किसी ने आवाज लगाई
काजल अचानक पीछे मुड़ी।
अंधेरे में एक आदमी खड़ा था।
दीपक उसे पहचान नहीं पाया।
उस आदमी ने कहा—
"तुमने कहा था कि ये आखिरी बार होगा।"
काजल ने जवाब दिया—
"मुझे ये करना ही पड़ेगा।"
दीपक का शक और गहरा गया।
उसे लगा कि उसकी पत्नी किसी बड़े अपराध में शामिल है।
लेकिन तभी उस आदमी ने एक नाम लिया—
"तुम्हारे ससुर ने मरने से पहले यही कहा था।"
दीपक चौंक गया।
दस साल पुराना मामला
काजल के साथ आया व्यक्ति रमेश था।
वह दीपक के दिवंगत पिता के खेतों में वर्षों पहले काम करता था।
रमेश ने बताया कि दीपक के पिता की मृत्यु से करीब दस साल पहले खेत की जमीन को लेकर बड़ा विवाद हुआ था।
कुछ जमीन के कागज गायब हो गए थे।
दीपक के पिता ने उन्हें खोजने की कोशिश की थी।
लेकिन दस्तावेज कभी नहीं मिले।
काजल को यह सब कैसे पता चला?
काजल ने बताया कि कुछ महीने पहले उसे घर के पुराने संदूक में एक चिट्ठी मिली थी।
चिट्ठी दीपक के पिता ने लिखी थी।
उसमें सिर्फ इतना लिखा था—
"अगर असली कागज कभी मिले तो पुराने खेत के उत्तर वाले हिस्से को देखना।"
काजल ने वह चिट्ठी छिपाकर रख ली।
उसने अकेले जांच शुरू की।
बाद में उसे रमेश के बारे में पता चला।
रमेश को भी इस पुराने मामले की जानकारी थी।
दीपक सामने आ गया
दीपक पेड़ के पीछे से बाहर निकला।
काजल उसे देखकर घबरा गई।
दीपक ने पूछा—
"तुमने मुझसे यह सब क्यों छिपाया?"
काजल की आंखों में आंसू आ गए।
उसने कहा—
"क्योंकि मुझे डर था कि तुम जल्दबाजी में किसी पर भरोसा कर लोगे।"
दीपक ने लोहे का डिब्बा उठाया।
उसमें कई पुराने जमीन के कागज थे।
लेकिन सबसे बड़ा सबूत डायरी में था
डायरी में पिछले दस वर्षों के कुछ लेनदेन लिखे थे।
कुछ जमीन की खरीद-बिक्री का विवरण था।
और एक व्यक्ति का नाम बार-बार लिखा था।
हरिराम।
हरिराम गांव का प्रभावशाली व्यापारी था।
उस समय उसने दीपक के पिता के साथ जमीन खरीदने का समझौता किया था।
लेकिन कागजों के अनुसार भुगतान पूरा नहीं हुआ था।
फिर भी जमीन का एक हिस्सा उसके नाम चला गया था।
मामला पुलिस तक पहुंचा
दीपक ने उसी रात पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
पुराने राजस्व रिकॉर्ड मंगवाए गए।
जांच में पता चला कि करीब दस साल पहले जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया था।
कुछ हस्ताक्षर और दस्तावेज संदिग्ध पाए गए।
अब पुराने मामले की जांच फिर शुरू हुई।
लेकिन काजल पर भी शक हुआ
पुलिस ने पूछा—
"आपने ये दस्तावेज इतने समय तक क्यों छिपाए?"
काजल ने बताया कि उसे डर था कि अगर हरिराम को पता चल गया कि असली कागज मिल गए हैं, तो वह उन्हें गायब कर सकता है।
उसका डर पूरी तरह बेबुनियाद भी नहीं था।
पुलिस को पता चला कि पिछले कुछ दिनों में कोई व्यक्ति रात में उस खेत के आसपास घूम रहा था।
सुबह खेत में फिर मिला एक सुराग
अगली सुबह पुलिस को गड्ढे के पास जूतों के निशान मिले।
वे निशान काजल या रमेश के नहीं थे।
पास ही एक पुराना वाहन खड़ा था।
उसके अंदर कुछ कागज और एक मोबाइल मिला।
मोबाइल में हरिराम के एक कर्मचारी से बातचीत के रिकॉर्ड थे।
इससे जांच और आगे बढ़ी।
आखिर खुला जमीन का खेल
जांच में सामने आया कि वर्षों पहले जमीन के कुछ हिस्से को गलत दस्तावेजों के आधार पर दूसरे नामों में दर्ज कराने की कोशिश हुई थी।
कई लोगों से पूछताछ हुई।
पुराने रिकॉर्ड दोबारा जांचे गए।
मामला अदालत और प्रशासन के सामने पहुंचा।
दीपक के परिवार को पहली बार अपने पिता की जमीन से जुड़े पुराने विवाद की पूरी तस्वीर दिखाई देने लगी।
दीपक को अपनी पत्नी पर किए शक का अफसोस हुआ
दीपक ने काजल से कहा—
"मुझे लगा था तुम रात में किसी से मिलने जा रही हो।"
काजल ने कहा—
"मुझे पता था कि तुम्हें ऐसा ही लगेगा। लेकिन मैं चाहती थी कि पहले सबूत मेरे हाथ में हों।"
दीपक ने पूछा—
"तुमने मुझसे मदद क्यों नहीं मांगी?"
काजल ने जवाब दिया—
"क्योंकि मुझे डर था कि अगर तुम्हें सब पता चला तो तुम गुस्से में सीधे उसी आदमी के पास चले जाओगे।"
अंत
जिस रात दीपक ने अपनी पत्नी को फावड़ा लेकर खेत की ओर जाते देखा, उसे लगा कि वह किसी से छिपकर मिलने जा रही है।
लेकिन खेत में खोदा गया गड्ढा किसी इंसान को छिपाने के लिए नहीं था।
वहां दस साल से दबे जमीन के दस्तावेज छिपे थे।
एक पुरानी चिट्ठी।
एक लोहे का डिब्बा।
एक डायरी।
और कुछ पुराने रिकॉर्ड ने उस परिवार के सामने ऐसा राज खोल दिया जिसे वे वर्षों पहले भूल चुके थे।
लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल आखिर तक बना रहा—
अगर काजल उस रात खेत में नहीं जाती, तो क्या वह पुराना राज कभी सामने आता?
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