शादी को अभी सिर्फ दो साल हुए थे।
राहुल और पूजा की जिंदगी देखने में बिल्कुल सामान्य थी। दोनों नौकरी करते थे, शाम को साथ खाना खाते और सप्ताहांत पर परिवार से मिलने जाते।
लेकिन पिछले तीन महीनों से पूजा ने पति के व्यवहार में एक अजीब बदलाव महसूस किया था।
हर रात करीब 11:40 बजे राहुल अचानक उठता।
बिना कोई आवाज किए बालकनी में जाता।
करीब दस मिनट तक वहां खड़ा रहता।
फिर वापस आकर ऐसे सो जाता जैसे कुछ हुआ ही न हो।
शुरुआत में पूजा ने इसे काम का तनाव समझा।
लेकिन एक रात उसने देखा कि राहुल बालकनी में जाने से पहले अपना मोबाइल भी साथ ले गया।
कुछ देर बाद उसने धीमी आवाज में कहा—
"मैंने कहा ना, अब इस बारे में बात मत करो।"
पूजा की नींद पूरी तरह उड़ गई।
आखिर वह किससे बात कर रहा था?
उस रात पूजा ने पीछा करने का फैसला किया
अगली रात पूजा ने जानबूझकर सोने का नाटक किया।
11:40 बजे राहुल फिर उठा।
मोबाइल उठाया और बालकनी में चला गया।
पूजा कुछ सेकंड बाद धीरे से उठी और कमरे के दरवाजे के पीछे खड़ी होकर उसकी बात सुनने लगी।
राहुल कह रहा था—
"मैं हर महीने पैसे भेज रहा हूं। लेकिन अब पूजा को बताना पड़ेगा।"
पूजा का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
किसे पैसे भेज रहा था राहुल?
क्या उसका कोई गुप्त रिश्ता था?
क्या शादी से पहले उसकी जिंदगी में कोई और महिला थी?
या फिर वह किसी ऐसे राज को छिपा रहा था जिससे उसकी पूरी शादी टूट सकती थी?
अगली सुबह बैंक स्टेटमेंट ने बढ़ाया शक
पूजा ने सीधे राहुल से सवाल नहीं किया।
उसने अगले दिन घर के जरूरी कागज ढूंढते समय बैंक की एक पुरानी फाइल देखी।
उसमें हर महीने एक ही खाते में पैसे भेजे जाने की जानकारी थी।
खाता किसी महिला के नाम था।
नाम था—
सविता शर्मा।
पूजा को कुछ समझ नहीं आया।
राहुल की मां का नाम भी सविता नहीं था।
उसने इंटरनेट पर नाम खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली।
उसी शाम पूजा ने राहुल से पूछा—
"सविता कौन है?"
राहुल अचानक चुप हो गया।
कुछ सेकंड बाद उसने कहा—
"तुमने मेरी फाइल क्यों देखी?"
पूजा ने जवाब दिया—
"क्योंकि तुम मुझसे कुछ छिपा रहे हो।"
राहुल बिना कुछ कहे घर से बाहर चला गया।
दरवाजे पर आया एक अनजान आदमी
अगली सुबह करीब 10 बजे घर की घंटी बजी।
दरवाजे पर लगभग 60 साल का एक आदमी खड़ा था।
उसने पूछा—
"क्या आप राहुल की पत्नी हैं?"
पूजा ने हाँ कहा।
आदमी ने अपना नाम बताया—
महेश।
उसने एक पुरानी तस्वीर पूजा को दी।
तस्वीर में राहुल करीब 15 साल का था।
उसके साथ एक छोटी लड़की खड़ी थी।
पीछे तारीख लिखी थी—
2011।
महेश ने कहा—
"यह लड़की सविता की बेटी है।"
पूजा ने हैरानी से पूछा—
"लेकिन राहुल का उससे क्या संबंध है?"
महेश कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला—
"राहुल ने उसकी जिंदगी बचाई थी।"
12 साल पुरानी घटना
महेश ने बताया कि 12 साल पहले राहुल के परिवार के पास एक छोटी बच्ची रहती थी।
वह बच्ची उनके पड़ोस में रहने वाली महिला सविता की बेटी थी।
एक दिन सविता अचानक गंभीर आर्थिक परेशानी में फंस गई।
बच्ची की पढ़ाई छूटने वाली थी।
राहुल उस समय कॉलेज में पढ़ता था।
उसने अपनी छात्रवृत्ति के पैसे से उसकी फीस भर दी।
बाद में नौकरी मिलने के बाद भी वह हर महीने उसकी पढ़ाई और इलाज के लिए पैसे भेजता रहा।
लेकिन राहुल ने कभी किसी को यह बात नहीं बताई।
फिर उसने यह सब छिपाया क्यों?
पूजा को अब भी एक सवाल परेशान कर रहा था।
"अगर यह इतना अच्छा काम था तो उसने मुझसे छिपाया क्यों?"
महेश ने बताया—
सविता के परिवार में कुछ लोगों ने राहुल पर गलत आरोप लगाए थे।
उन्होंने कहा था कि वह परिवार की मदद करने के बहाने उनकी संपत्ति पर नजर रख रहा है।
राहुल ने विवाद बढ़ने से बचने के लिए चुप रहना बेहतर समझा।
लेकिन सविता की बेटी की पढ़ाई जारी रही।
कुछ वर्षों बाद वह विदेश में पढ़ाई करने चली गई।
अब वह अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी थी।
लेकिन सविता अभी भी बीमार थी।
इसीलिए राहुल हर महीने उसकी मदद करता था।
पूजा को सबसे बड़ा झटका तब लगा
महेश ने एक और बात बताई।
"सविता चाहती है कि राहुल अब अपनी जिंदगी में आगे बढ़े। उसने कहा है कि अब उसकी मदद की जरूरत नहीं है।"
पूजा की आँखें भर आईं।
उसे याद आया कि पिछले तीन महीनों से राहुल बालकनी में फोन पर यही बात करता था।
वह सविता को समझा रहा था कि मदद बंद करने की जरूरत नहीं है।
लेकिन वह किसी के सामने इस बात का प्रदर्शन नहीं करना चाहता था।
असली मुलाकात
कुछ दिनों बाद पूजा खुद राहुल के साथ सविता से मिलने गई।
सविता ने पूजा का हाथ पकड़कर कहा—
"मुझे डर था कि मेरी वजह से तुम्हारी शादी में कोई गलतफहमी न हो जाए।"
पूजा ने मुस्कुराकर कहा—
"गलतफहमी हुई जरूर थी... लेकिन अब नहीं है।"
राहुल चुपचाप दोनों को देखता रहा।
घर लौटते समय पूजा ने पति से सिर्फ एक बात कही—
"अगली बार कोई इतनी बड़ी बात छिपाना मत।"
राहुल ने पूछा—
"तुम नाराज नहीं हो?"
पूजा ने कहा—
"नहीं। बस इतना समझ गई हूं कि जिस आदमी को मैं दो साल से जानती हूं, उसके अंदर कई ऐसी कहानियां हैं जिनके बारे में मुझे पता ही नहीं था।"
दोनों मुस्कुरा दिए।
उस रात पहली बार राहुल बालकनी में नहीं गया।
क्योंकि अब उसे किसी से कुछ छिपाकर बात करने की जरूरत नहीं थी।
कभी-कभी किसी रिश्ते में सबसे बड़ा रहस्य बेवफाई नहीं, बल्कि किसी के अच्छे काम को दुनिया से छिपाकर रखना भी हो सकता है।
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