रात के करीब 9 बजे शादी का मंडप रोशनी से जगमगा रहा था।
अर्जुन दूल्हे के कपड़ों में बैठा था।
घर में रिश्तेदारों की भीड़ थी। संगीत बज रहा था। लोग हंस रहे थे।
लेकिन अर्जुन की नजर बार-बार दरवाजे की तरफ जा रही थी।
वह किसी का इंतजार कर रहा था।
नैना का।
नैना उसकी जिंदगी का वह हिस्सा थी जिसके बारे में उसके परिवार को कुछ नहीं पता था।
दोनों पिछले पांच साल से एक-दूसरे से प्रेम करते थे।
लेकिन अर्जुन के परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी।
अर्जुन ने नैना से कहा था—
"मैं आखिरी वक्त तक कोशिश करूंगा। अगर कुछ नहीं हुआ तो कम से कम तुमसे एक बार मिलकर सब समझाऊंगा।"
नैना ने सिर्फ इतना कहा था—
"मैं तुम्हारी शादी में नहीं आऊंगी।"
लेकिन अर्जुन को भरोसा था कि वह आएगी।
शादी शुरू होने से कुछ मिनट पहले
अचानक अर्जुन के मोबाइल पर एक संदेश आया।
"मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है। पुराने कमरे में अकेले आओ।"
नंबर नैना का था।
अर्जुन तुरंत उठ गया।
वह घर के पीछे बने पुराने कमरे में पहुंचा।
लेकिन वहां कोई नहीं था।
टेबल पर सिर्फ एक छोटा-सा लिफाफा रखा था।
अर्जुन ने उसे खोला।
अंदर एक पुरानी तस्वीर थी।
तस्वीर में अर्जुन और नैना करीब दस साल छोटे दिखाई दे रहे थे।
पीछे लिखा था—
"अगर तुमने यह पढ़ लिया है, तो समझना कि मैंने तुम्हें छोड़ने का फैसला नहीं किया... बल्कि तुम्हें बचाने का फैसला किया है।"
अर्जुन कुछ समझ नहीं पाया।
तभी बाहर से किसी ने आवाज लगाई—
"अर्जुन! जल्दी आओ, रस्म शुरू होने वाली है।"
वह लिफाफा लेकर वापस मंडप में आ गया।
लेकिन नैना वहां नहीं थी।
अगली सुबह पता चला—नैना गायब थी
अर्जुन ने पूरी रात उसे फोन किया।
फोन बंद था।
उसने उसके घर फोन किया।
परिवार ने बताया कि नैना रात से घर नहीं लौटी थी।
अर्जुन के होश उड़ गए।
वह शादी तो कर चुका था, लेकिन उसका दिमाग नैना को खोजने में लगा था।
उसने अपने सबसे करीबी दोस्त विवेक को सारी बात बताई।
विवेक ने कहा—
"तुम्हें वह लिफाफा पुलिस को देना चाहिए।"
लेकिन अर्जुन ने मना कर दिया।
उसे डर था कि मामला परिवार और समाज के बीच तमाशा बन जाएगा।
अगले कुछ दिनों तक नैना का कोई पता नहीं चला।
फिर धीरे-धीरे जिंदगी आगे बढ़ गई।
लेकिन अर्जुन के मन में वह सवाल हमेशा रहा—
नैना उस रात आखिर गई कहां थी?
दस साल बाद
अर्जुन अब दो बच्चों का पिता था।
वह नैना को लगभग भूल चुका था।
तभी एक दिन उसके कार्यालय में एक महिला मिलने आई।
उसने अपना नाम बताया—
नैना।
अर्जुन कुछ सेकंड तक उसे देखता रह गया।
दस साल बाद वही चेहरा उसके सामने था।
लेकिन नैना पहले से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही थी।
उसने कहा—
"मुझे पता था कि एक दिन तुम्हें सच बताना पड़ेगा।"
अर्जुन ने पूछा—
"तुम उस रात गायब क्यों हो गई थीं?"
नैना ने एक लंबी सांस ली।
फिर उसने बैग से वही पुरानी तस्वीर निकाली।
तस्वीर का असली मतलब
नैना ने बताया कि शादी से कुछ दिन पहले उसे अर्जुन के परिवार के बारे में एक पुराना दस्तावेज मिला था।
उस दस्तावेज में पता चला कि अर्जुन के पिता पर वर्षों पहले आर्थिक धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था।
लेकिन असली कागजों के अनुसार वह आरोप गलत था।
किसी और व्यक्ति ने कारोबार में गड़बड़ी की थी।
अर्जुन के पिता ने अपने परिवार की इज्जत बचाने के लिए खुद सारी जिम्मेदारी ले ली थी।
नैना ने यह सच खोज लिया था।
लेकिन वह इससे भी ज्यादा चौंक गई थी।
जिस व्यक्ति ने अर्जुन के पिता को फंसाया था...
वह आज भी अर्जुन के परिवार के बेहद करीब था।
नैना ने शादी में जाने से क्यों मना किया?
नैना ने कहा—
"मैं तुम्हें उस दिन सब बताना चाहती थी। लेकिन मुझे डर था कि अगर मैंने मंडप में यह बात बताई तो तुम्हारे परिवार में बहुत बड़ा विवाद हो जाएगा।"
अर्जुन ने पूछा—
"फिर तुम गई कहां?"
नैना ने जवाब दिया—
"मैंने सबूत इकट्ठे करने के लिए शहर छोड़ दिया था।"
उसने बताया कि उसके पास कुछ पुराने बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेज थे।
लेकिन उसे डर था कि वे सबूत गलत लोगों के हाथ लग सकते हैं।
इसलिए उसने दस साल तक उन दस्तावेजों को सुरक्षित रखा।
फिर उसने एक और लिफाफा निकाला
इस बार अंदर कई कागज थे।
अर्जुन ने दस्तावेज पढ़े तो उसके हाथ कांपने लगे।
उनमें बैंक लेनदेन का विवरण था।
सालों पुराने खातों में हुई रकम की आवाजाही साफ दिखाई दे रही थी।
अर्जुन को पहली बार समझ आया कि उसके पिता ने जिस बात को अपने साथ दफन कर दिया था, वह वास्तव में सच नहीं थी।
उन्होंने अपने परिवार को बचाने के लिए खुद पर दोष लिया था।
लेकिन नैना दस साल तक वापस क्यों नहीं आई?
अर्जुन ने यही सवाल पूछा।
नैना ने कहा—
"क्योंकि तुम्हारी शादी हो चुकी थी।"
अर्जुन चुप हो गया।
नैना ने आगे कहा—
"मैं तुम्हारी जिंदगी खराब नहीं करना चाहती थी। मेरे पास सच था, लेकिन तुम्हारे वर्तमान को बर्बाद करने का अधिकार नहीं था।"
अर्जुन के पास कोई जवाब नहीं था।
असली दोषी कौन था?
दस्तावेजों की दोबारा जांच कराई गई।
पुराने रिकॉर्ड खोले गए।
कई लोगों के बयान लिए गए।
आखिरकार यह सामने आया कि अर्जुन के पिता पर लगाया गया आरोप पूरी तरह सही नहीं था।
जिस व्यक्ति ने उस समय आर्थिक गड़बड़ी की थी, उसने दूसरे लोगों के नाम का इस्तेमाल किया था।
अर्जुन के पिता ने परिवार की प्रतिष्ठा बचाने के लिए खुद जिम्मेदारी स्वीकार कर ली थी।
सालों बाद उनका नाम साफ हुआ।
आखिरी मुलाकात
अर्जुन ने नैना से पूछा—
"तुम चाहती तो यह सच दस साल पहले भी बता सकती थीं।"
नैना मुस्कुराई।
"तब मैं सिर्फ तुम्हारी प्रेमिका थी। आज मैं तुम्हारे अतीत का एक अधूरा सच पूरा करके जा रही हूं।"
अर्जुन ने पूछा—
"और तुम?"
नैना ने कहा—
"मैं अपनी जिंदगी में बहुत आगे बढ़ चुकी हूं।"
वह मुड़ी और चली गई।
अर्जुन कुछ देर तक उसे देखता रहा।
उसने पहली बार समझा कि हर अधूरी प्रेम कहानी का अंत दोबारा साथ आने में नहीं होता।
कभी-कभी कोई इंसान आपकी जिंदगी में सिर्फ इसलिए आता है कि वह आपके अतीत का कोई बंद दरवाजा खोल सके।
और फिर हमेशा के लिए चला जाए।
उस रात अर्जुन ने वह पुरानी तस्वीर अपने पिता की तस्वीर के पास रख दी।
नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी—
"कुछ रिश्ते साथ रहने के लिए नहीं, सच तक पहुंचाने के लिए आते हैं।"
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