पति को लगा पत्नी का किसी और से अफेयर है... लेकिन जिस रात उसने उसका पीछा किया, सामने आया 10 साल पुराना अपराध

 


अमित अपनी पत्नी राधिका के साथ रहता था। शादी को सात साल हो चुके थे। दोनों की जिंदगी सामान्य थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से राधिका का व्यवहार बदल गया था।

वह अक्सर शाम को तैयार होकर घर से निकलती।

अमित पूछता—

"कहां जा रही हो?"

राधिका हर बार अलग जवाब देती।

कभी सहेली के घर।

कभी मंदिर।

कभी किसी रिश्तेदार के यहां।

लेकिन एक बात हर बार समान थी।

वह दो-तीन घंटे बाद ही लौटती थी।

अमित को शक होने लगा कि शायद उसकी पत्नी का किसी और पुरुष से संबंध है।


एक संदेश ने शक और बढ़ा दिया

एक रात राधिका नहाने गई थी।

उसका फोन टेबल पर पड़ा था।

तभी स्क्रीन पर संदेश आया—

"आज पुरानी जगह पर आना। इस बार देर मत करना।"

नंबर सेव नहीं था।

अमित ने संदेश पढ़ा और चुप हो गया।

उसने फैसला किया कि अब वह राधिका से सवाल नहीं करेगा।

वह उसका पीछा करेगा।


राधिका एक सुनसान जगह पहुंची

अगली शाम राधिका घर से निकली।

अमित कुछ दूरी से उसके पीछे चला।

राधिका शहर के पुराने हिस्से में पहुंची और एक बंद पड़ी मिल के पास उतर गई।

अमित को पूरा यकीन हो गया कि यहां कोई प्रेमी उससे मिलने वाला है।

लेकिन कुछ मिनट बाद वहां एक अधेड़ उम्र का आदमी पहुंचा।

उसके हाथ में पुराना बैग था।

राधिका ने उसे देखते ही कहा—

"क्या आपको वह मिल गया?"

आदमी ने बैग उसकी तरफ बढ़ाया।

"हां, लेकिन इसे संभालकर रखना।"

अमित दूर से सब देख रहा था।


तभी आदमी ने एक नाम लिया

उसने कहा—

"तुम्हारे पिता ने मरने से पहले यही कहा था कि अगर यह कागज कभी बाहर आया तो कई लोगों की जिंदगी बदल जाएगी।"

अमित यह सुनकर ठिठक गया।

उसके पिता?

अमित के पिता की मृत्यु दस साल पहले हो चुकी थी।

उसने कभी नहीं सुना था कि उनके पास ऐसा कोई राज था।


अमित ने खुद को रोक नहीं पाया

वह अचानक उनके सामने पहुंच गया।

राधिका घबरा गई।

अमित ने पूछा—

"यह सब क्या है?"

राधिका कुछ नहीं बोली।

अधेड़ व्यक्ति ने कहा—

"अब शायद आपको सब जानना ही चाहिए।"

उसने बैग खोला।

अंदर पुराने दस्तावेज, तस्वीरें और एक डायरी थी।


डायरी में लिखा था एक बड़ा राज

अमित के पिता दस साल पहले एक निर्माण कंपनी में साझेदार थे।

कंपनी के एक बड़े प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ था।

अमित के पिता को इसकी जानकारी मिल गई थी।

उन्होंने सबूत जुटाना शुरू किया।

लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी अचानक मृत्यु हो गई।

परिवार ने इसे सामान्य बीमारी माना।

मामला वहीं खत्म हो गया।

लेकिन डायरी में लिखा था—

"अगर मैं नहीं रहा तो असली कागज मिल की पुरानी मशीन के नीचे मिलेंगे।"


राधिका को यह सब कैसे पता चला?

राधिका ने बताया कि उसे कुछ महीने पहले अमित के पुराने सामान में एक चिट्ठी मिली थी।

चिट्ठी में उसी मिल का जिक्र था।

उसने अकेले इसकी जांच शुरू की।

बाद में उसे वह अधेड़ व्यक्ति मिला।

उसका नाम हरीश था।

वह अमित के पिता की कंपनी में काम करता था।

वह इस मामले का गवाह था।


अमित को सबसे बड़ा झटका

अमित ने पूछा—

"तुमने मुझसे यह सब क्यों छिपाया?"

राधिका ने कहा—

"क्योंकि मुझे डर था कि अगर तुम्हें पता चला तो तुम बिना सोचे उन लोगों से भिड़ जाओगे।"

अमित बोला—

"लेकिन मैं तुम्हें रोज किसी से मिलते देख रहा था। मुझे लगा..."

राधिका ने उसकी बात काटते हुए कहा—

"मुझे पता था कि तुम्हें गलतफहमी होगी। लेकिन मेरे पास कोई रास्ता नहीं था।"


तभी दूर से एक कार की आवाज आई

हरीश अचानक चुप हो गया।

उसने सड़क की तरफ देखा।

एक काली कार धीरे-धीरे मिल के पास आकर रुकी।

हरीश ने कहा—

"हमें यहां से जाना होगा।"

अमित ने पूछा—

"क्यों?"

हरीश ने जवाब दिया—

"क्योंकि यह वही आदमी है जिसने दस साल पहले तुम्हारे पिता को चुप कराने की कोशिश की थी।"


तीनों वहां से निकलने की कोशिश करने लगे

लेकिन कार से दो लोग बाहर आ गए।

अमित ने तुरंत पुलिस को फोन किया।

कुछ देर बाद पुलिस की टीम पहुंच गई।

दोनों संदिग्ध भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।

उनके पास से पुराने दस्तावेज और एक पेन ड्राइव मिली।


पेन ड्राइव में था सबसे बड़ा सबूत

पेन ड्राइव में दस साल पुरानी रिकॉर्डिंग थी।

उसमें कुछ लोग कंपनी के पैसे और जमीन के दस्तावेजों को लेकर बातचीत कर रहे थे।

आवाजों में से एक आवाज उस व्यक्ति की थी जो आज भी शहर में कारोबार कर रहा था।

अमित को विश्वास नहीं हो रहा था।

जिस व्यक्ति को वह वर्षों से परिवार का सम्मानित सदस्य समझता था...

वही पुराने मामले में मुख्य संदिग्धों में से एक था।


क्या अमित के पिता की मौत हत्या थी?

पुलिस ने पुराने मामले की जांच फिर शुरू की।

मेडिकल रिकॉर्ड और पुराने दस्तावेजों की समीक्षा की गई।

लेकिन तत्काल ऐसा कोई निर्णायक प्रमाण नहीं मिला जिससे उनकी मृत्यु को हत्या कहा जा सके।

हालांकि वित्तीय घोटाले और सबूत मिटाने की कोशिश के मामले में जांच आगे बढ़ी।


राधिका का सच सामने आया

अमित को आखिरकार समझ आया कि उसकी पत्नी किसी प्रेमी से मिलने नहीं जा रही थी।

वह उसके पिता की मौत और पुराने कारोबार से जुड़े रहस्य की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी।

लेकिन राधिका ने एक गलती जरूर की थी।

उसने अपने पति से सच छिपाया।

और इसी वजह से अमित के मन में उसके चरित्र को लेकर शक पैदा हो गया।


अंत

अमित ने सोचा था कि उसकी पत्नी का किसी दूसरे पुरुष से संबंध है।

उसने उसका पीछा किया।

लेकिन जिस जगह उसे प्रेमी मिलने की उम्मीद थी...

वहां उसे अपने पिता से जुड़ा दस साल पुराना अपराध मिल गया।

एक पुरानी डायरी।

कुछ गायब दस्तावेज।

एक गवाह।

और एक पेन ड्राइव ने उस कहानी को फिर जिंदा कर दिया जिसे परिवार वर्षों पहले भूल चुका था।

राधिका ने अमित से कहा—

"तुम्हें मुझ पर शक हुआ, यह मेरी गलती से हुआ। लेकिन जिस सच को मैं खोज रही थी, वह तुम्हारी सोच से कहीं बड़ा था।"

अमित ने जवाब दिया—

"अब समझ आया कि कभी-कभी जो दिखाई देता है, असली कहानी उसके पीछे छिपी होती है।"

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