हरिद्वार में ₹10 की खीरे की चाट बेच रहा था मासूम बच्चा, यूट्यूबर ने वीडियो बनाकर कहा ‘इससे मत खरीदना, लूट रहा है’, लोग बोले—गरीब की मेहनत को बदनाम क्यों कर रहे हो?

 


हरिद्वार में एक मासूम बच्चे का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि बच्चा नहर के बीच बने पुल पर खीरे की चाट की छोटी-सी प्लेट लगाकर लोगों को बेच रहा था। उसकी चाट की कीमत महज 10 रुपये बताई जा रही है।

वीडियो में बच्चा किसी से भीख मांगता हुआ नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से कुछ पैसे कमाने की कोशिश करता हुआ नजर आ रहा है। वह राहगीरों को खीरे की चाट बनाकर दे रहा है और इसी से अपनी रोजी-रोटी चलाने की कोशिश कर रहा है।

मामला तब चर्चा में आया जब एक यूट्यूबर ने बच्चे का वीडियो बनाना शुरू किया। वायरल पोस्ट के मुताबिक, वीडियो में यूट्यूबर ने लोगों से बच्चे से खीरे की चाट नहीं खरीदने की बात कही और उसे कथित तौर पर “लूटने वाला” बताया।

यही बात सोशल मीडिया पर कई लोगों को पसंद नहीं आई। लोगों का सवाल है कि अगर किसी व्यक्ति को बच्चे से सामान नहीं खरीदना है तो वह न खरीदे, लेकिन महज 10 रुपये की चाट बेचकर मेहनत करने वाले बच्चे को सार्वजनिक रूप से बदनाम करना क्या उचित है?

लोगों का कहना है कि गरीब परिवार से आने वाला कोई बच्चा अगर मेहनत करके कुछ पैसे कमाने की कोशिश कर रहा है तो उसकी हौसला अफजाई होनी चाहिए। उसे अपमानित करने या उसकी रोजी-रोटी को नुकसान पहुंचाने वाला वीडियो बनाने के बजाय उसकी स्थिति को समझने की कोशिश की जानी चाहिए।

हालांकि, इस वायरल दावे में बच्चे की उम्र, उसके परिवार की आर्थिक स्थिति और वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की पूरी बातचीत जैसी कई बातों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें अंतिम तथ्य मानने के बजाय वायरल पोस्ट में किए गए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड की वायरल सामग्री बनाने के लिए किसी गरीब और मेहनतकश व्यक्ति की रोजी-रोटी को निशाना बनाना सही है?

अगर किसी को सामान महंगा लगता है तो वह खरीदने से मना कर सकता है। लेकिन मेहनत करने वाले किसी छोटे दुकानदार या बच्चे को बिना पर्याप्त आधार के “लुटेरा” कहना उसके सम्मान और कमाई, दोनों पर असर डाल सकता है।

यह भी जरूरी है कि अगर बच्चा वास्तव में नाबालिग है और नियमित रूप से काम कर रहा है, तो उसके परिवार की परिस्थिति और बाल श्रम से जुड़े कानूनी पहलुओं को भी संवेदनशीलता से देखा जाए। केवल वीडियो वायरल कर देना समस्या का समाधान नहीं है।

गरीबी में भी मेहनत करने वाले हर इंसान की मेहनत का सम्मान होना चाहिए। खरीदना है तो खरीदिए, नहीं खरीदना है तो आगे बढ़ जाइए—लेकिन किसी की रोजी-रोटी को मजाक या वायरल कंटेंट मत बनाइए।

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