खुद भी चाणक्य इसी नीति का पालन कर चतुराई और बुद्धिमानी से अपनी बात किसी से भी मनवा लेते थे।नीति शास्त्र की ये नीति अगर आप समझ जाएं तो दुनिया आपके कदमों में होगी और लोग आपके पीछे पीछे घूमेंगे।
लुब्धमर्थेन गृह्णीयात् स्तब्धमंजलिकर्मणा ।
मूर्खं छन्दानुवृत्त्या च यथार्थत्वेन पण्डितम् ।।
लालची
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि कपटी और लालची किसी भी चीज को पाने के लिए कई हदों को पार कर देता है।
लालची व्यक्ति मीठी मीठी बातें कर आपको अपने जाल में फंसाता है और जब काम बन जाता है तो पीछे मुड़कर भी नहीं देखता।ऐसे लोगों को धन देकर वश में किया जा सकता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि एक ही बार में सब ना दे। थोड़ा थोड़ा देकर ही लालची व्यक्ति को वश में रख सकते हैं।
अंहकारी
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अंहकारी का अंहकार कभी ना तोड़े बल्कि उसके सामने हाथ जोड़कर या फिर उसकी तारीफ करके आप उसे अपने वश में कर सकते हैं।
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