रामबाबू बस से अपने स्टॉप पर जब उतरे तब रात के नौ बज चुके थे। हल्की बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया था। रामबाबू ने गुनगुनाते हुए जेब से मोबाइल निकाला और रील स्क्रॉल करने लगे। रील देखते हुए वे आगे बढ़ते जा रहे थे। उनकी गली सूनसान पड़ी थी। इसलिए वे रील देखने में पूरी तरह डूब गए। गली के अंत में पहुंच कर उन्होंने दरवाजे पर लगी बेल दबा दी। कुछ क्षण बाद एक महिला ने दरवाजा खोला और फिर पलटकर अंदर एक कुर्सी पर बैठ गई। वह भी अपने मोबाइल पर नजरें गड़ाए कुछ मजेदार देख रही थी।रामबाबू अंदर घुसे और जाकर सोफे पर बैठ गए। फिर रामबाबू ने कहा, एक गिलास पानी देना। महिला अंदर गई और पानी का गिलास भरकर रामबाबू के सामने खड़ी हो गई। रामबाबू ने गिलास थामने के जैसे ही आंखें मोबाइल से हटाई तो चौंक कर खड़े हो गए।
रामबाबू ने हैरत भरी आवाज में पूछा, आप कौन हैं। उनकी आवाज सुनकर महिला ने भी मोबाइल से नजरें उठाईं तो तेज आवाज में बोली, आप कौन हैं। फिर रामबाबू ने अपने चारों ओर देखा। वे अपने घर में नहीं थे। वे किसी दूसरे के घर में थे। दोनों एक-दूसरे को हैरानी भरी नजरों से देख रहे थे। दोनों समझ गए कि मोबाइल देखने के चक्कर में आज दोनों ने क्या कर दिया। रामबाबू किसी दूसरे घर को अपना समझ कर घुस गए और महिला ने उन्हें अपना पति समझकर अंदर घुसा लिया।
दोनों पढ़े-लिखे समझदार थे। अपनी ग़लती फौरन उनकी समझ में आ गई। रामबाबू ने महिला से माफी मांगी। फिर दोनों ने एक-दूसरे को अपना-अपना परिचय दिया। महिला को रामबाबू का अंदाज पसंद या क्या हुआ, उसने चाय ऑफर कर दी। रामबाबू फिर से बैठ गए। चाय आई तो दोनों में बातचीत भी शुरू हो गई। दोनों ने एक-दूसरे को समझा और जाना।
रामबाबू जब चलने लगे तब महिला ने अपना मोबाइल नंबर दिया और उनका सेव कर लिया। इसके बाद जो हुआ वो एक मजेदार किस्सा है।
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