गांव के बाहर एक बेहद प्राचीन मंदिर था। मंदिर समय की मार झेल चुका था, लेकिन उसकी दिव्यता आज भी वैसी ही थी। मंदिर के सामने विशाल पत्थरों से बना एक ऊंचा चबूतरा था


गांव के बाहर एक बेहद प्राचीन मंदिर था। मंदिर समय की मार झेल चुका था, लेकिन उसकी दिव्यता आज भी वैसी ही थी। मंदिर के सामने विशाल पत्थरों से बना एक ऊंचा चबूतरा था, जिस पर पंचमुखी हनुमान जी की अद्भुत प्रतिमा विराजमान थी। उनकी पूरी देह गहरे लाल सिंदूर से चमकती रहती, सिर पर स्वर्ण मुकुट दमकता और पास में रखी विशाल गदा उनकी अपार शक्ति का प्रतीक थी।

गांव के लोग मानते थे कि रात के समय स्वयं बजरंगबली उस स्थान की रक्षा करते हैं। कोई भी व्यक्ति सूर्य ढलने के बाद उस मंदिर के पास जाने की हिम्मत नहीं करता था।

कुछ समय बाद गांव में अजीब घटनाएं शुरू हो गईं। रात होते ही खेतों की तरफ से किसी के रोने और चीखने जैसी आवाजें आने लगतीं। पशु अचानक बीमार पड़ जाते, छोटे बच्चे बिना वजह डरकर रोने लगते और कई लोगों ने पहाड़ी के पीछे काली परछाई घूमते देखने का दावा किया। डर इतना बढ़ गया कि लोग शाम होते ही अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते।

गांव के बुजुर्गों ने कहा कि पहाड़ी के पीछे रहने वाली एक दुष्ट शक्ति फिर से जाग चुकी है।

उसी गांव में अर्जुन नाम का एक साहसी लड़का रहता था। वह बचपन से ही हनुमान जी का परम भक्त था। हर मंगलवार मंदिर जाकर दीपक जलाता, सिंदूर चढ़ाता और पूरी श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करता।

जब गांव में भय बढ़ने लगा तो अर्जुन ने निश्चय किया कि वह इस रहस्य का पता लगाएगा।

एक रात, आधी रात के समय, वह अकेले मंदिर पहुंच गया। चारों ओर गहरा सन्नाटा था। आसमान में चमकता चांद मंदिर की दीवारों पर पड़ रहा था। पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा चांदनी में और भी दिव्य दिखाई दे रही थी। सिंदूर की सुगंध हवा में फैल रही थी।

तभी अचानक तेज हवा चलने लगी। मंदिर की घंटियां अपने आप बज उठीं। अर्जुन का दिल तेजी से धड़कने लगा। तभी उसने देखा कि पंचमुखी हनुमान जी की आंखों से लाल प्रकाश निकल रहा है।

उसी क्षण चबूतरे के पास रखी विशाल गदा धीरे-धीरे चमकने लगी।

डर के बावजूद अर्जुन हाथ जोड़कर बोला —

“हे संकटमोचन, अगर आप सच में यहां विराजमान हैं तो हमारे गांव की रक्षा कीजिए।”

अचानक धरती कांप उठी। मंदिर के पीछे की पहाड़ी से काली धुंध जैसी एक विशाल छाया निकलने लगी। उसकी आंखें जलते अंगारों की तरह चमक रही थीं। उसकी डरावनी आवाज पूरे वातावरण में गूंजने लगी।

दूर गांव से लोगों की चीखें सुनाई देने लगीं।

तभी एक अद्भुत चमत्कार हुआ। पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा जीवित हो उठी। उनके पांचों मुखों से तेज दिव्य प्रकाश निकलने लगा। पूरा आकाश “जय श्री राम” के जयकारों से गूंज उठा।

हनुमान जी ने अपनी विशाल गदा उठाई और एक ही प्रहार में उस दुष्ट छाया पर वार किया।

प्रहार इतना शक्तिशाली था कि पूरी पहाड़ी कांप उठी। काली छाया दर्द से चीखती हुई राख में बदल गई। उसी क्षण चारों ओर तेज प्रकाश फैल गया और वातावरण पूरी तरह शांत हो गया।

कुछ पल बाद सब पहले जैसा हो गया। प्रतिमा फिर स्थिर हो चुकी थी, मानो कुछ हुआ ही ना हो।

सुबह जब गांव वाले डरते-डरते मंदिर पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। चबूतरे पर ताजा सिंदूर बिखरा पड़ा था। हनुमान जी की गदा पर मिट्टी और काले निशान लगे हुए थे, जैसे रात में सचमुच कोई भयंकर युद्ध हुआ हो।

उस दिन के बाद गांव में फिर कभी कोई अनहोनी नहीं हुई। खेत हरे-भरे रहने लगे, पशु स्वस्थ हो गए और लोगों के मन से भय हमेशा के लिए खत्म हो गया।

आज भी गांव के बुजुर्ग कहते हैं —

“अगर सच्चे मन से बजरंगबली को पुकारो, तो पंचमुखी हनुमान जी अपने भक्तों की रक्षा के लिए अवश्य आते हैं।”

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