शास्त्रों के अनुसार मंदिर में खड़े खड़े दर्शन करना ग़लत है। आइए जानते हैं कैसे।

इसलिए मंदिर जाएं तो यह ध्यान रखें कि मंदिर में भगवान के दर्शन हमेशा बैठकर करें। साथ ही दर्शन करते समय यह ध्यान रखें सबसे

पहले मूर्ति के चरणों को देखें नतमस्तक होकर प्रार्थना करें।

फिर देवता के वक्ष पर, अर्थात् अनाहतचक्र पर मन एकाग्र करें व अंत में देव मूर्ति के नेत्रों की देखें व उनके रूप को अपने नेत्रों में बसाएं।

मंदिर में कुछ भी मांगने या प्रार्थना करते समय दान लेने की, क्षमा याचना या आशीर्वाद लेने की अवस्था में बैठकर प्रार्थना करें।

इससे आपकी हर मनोकामना तो शीघ्र ही पूरी होगी। साथ ही मंदिर जाने के पूर्ण सकारात्मक परिणाम भी मिलने लगेंगे।

हे परमात्मा आप की असीम कृपा मुझ पर बरस रही है मैं आप को प्रणाम करता हूँ ।

जरा सोचिये हमने क्या किया ?

1. चोटियां छोड़ी ,

2. टोपी, पगड़ी छोड़ी ,

3. तिलक, चंदन छोड़ा

4. कुर्ता छोड़ा ,धोती छोड़ी ,

5. यज्ञोपवीत छोड़ा ,

6. संध्या वंदन छोड़ा ।

7. रामायण पाठ, गीता पाठ छोड़ा ,

8. महिलाओं, लडकियों ने साड़ी छोड़ी , दुपट्टा, चुनरी छोड़ी।

9. पैसे के लिये, बच्चे छोड़े (आया पालती है)

10. संस्कृत छोड़ी , हिन्दी छोड़ी ,

11. श्लोक छोडे, लोरी छोड़ी ।

12. बच्चों के सारे संस्कार (बचपन के) छोड़े ,

13. सुबह शाम मिलने पर राम राम छोड़ी ,

14. पांव लागूं, चरण स्पर्श, पैर छुना छोड़े ,

15. घर परिवार छोड़े (अकेले सुख की चाह में संयुक्त परिवार)।

अब कोई रीति या परंपरा बची है?

ऊपर से नीचे तक गौर करो, तुम कहां पर हिन्दू हो, भारतीय हो, सनातनी हो, ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो

कहीं पर भी उंगली रखकर बता दो कि हमारी परंपरा को मैनें ऐसे जीवित रखा हैं

जिस तरह से हम धीरे धीरे बदल रहे हैं- जल्द ही समाप्त भी हो जाएंगे।

बौद्धों ने कभी सर मुंडाना नहीं छोड़ा!

▪️ सिक्खों ने भी सदैव पगड़ी का पालन किया!

▪️ मु स लमान ने न दाढ़ी छोडी और न ही 5 बार नमाज पढ़ना!

▪️ ईसाई भी संडे को चर्च जरूर जाता है!

फिर हिन्दू अपनी पहचान-संस्कारों से क्यों दूर हुआ?

कहाँ लुप्त हो गये- गुरुकुल की शिखा, यज्ञ, शस्त्र-शास्त्र, नित्य मंदिर जाने का संस्कार ?

हम अपने संस्कारों से विमुख हुए, इसी कारण हम विलुप्त हो रहे हैं।

अपनी पहचान बनाओ! अपने मूल-संस्कारों को अपनाओ!!!

सप्ताह मे कम से कम एक दिन तो मन्दिर जाना शुरु करो बच्चों के साथ।

जय माता दी , जय सनातन संस्कृति, जय श्री राम 

इस जानकारी को जितना हो सके आगे बढ़ाएं

 राधे राधे राधे कृष्ण राधे राधे राधे कृष्ण राधा ही राधे राधे कृष्ण

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