भोलेनाथ की तीन हार और जीवन का सबसे बड़ा सबक - परिवार की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। भगवान शिव ने पूछा, तो मैं क्या करूं? पार्वती जी बोलीं, कुछ काम कीजिए, मेहनत करके कमाइए

कैलाश पर्वत पर एक सुबह माता पार्वती बहुत चिंतित थीं। वे घर और परिवार की सारी जिम्मेदारियां संभाल रही थीं, जबकि भगवान शिव ध्यान में लीन थे। आखिर उन्होंने शिव जी से कहा, स्वामी, केवल ध्यान से जीवन नहीं चलता। परिवार की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।

भगवान शिव ने पूछा, तो मैं क्या करूं?

पार्वती जी बोलीं, कुछ काम कीजिए, मेहनत करके कमाइए।

तभी नंदी ने सुझाव दिया कि वे भगवान जगन्नाथ के पास जाकर खेती करें। शिव जी वृंदावन पहुंचे और जगन्नाथ से खेत मांगा। जगन्नाथ ने शर्त रखी कि फसल का नीचे वाला हिस्सा उनका और ऊपर वाला शिव जी का होगा, भोले नाथ मान गए।

पहली बार आलू बोया गया। फसल तैयार हुई तो ऊपर पत्तियां थीं और नीचे आलू। शिवजी के हिस्से में केवल पत्तियां आईं। दूसरी और तीसरी बार भी अलग-अलग फसलों में वे समझदारी की कमी से नुकसान उठा बैठे।

लेकिन अंत में भगवान जगन्नाथ बोले, महादेव, मैंने आपको खेती नहीं, जीवन सिखाया है। हार हमेशा हार नहीं होती, वह सीख भी होती है।

शिव जी समझ गए कि उन्होंने तीन बार हार नहीं मानी थी, बल्कि तीन नए सबक सीखे थे। बिना समझे भरोसा नहीं करना चाहिए, परिस्थितियों को समझना चाहिए और हर चीज हमारे नियंत्रण में नहीं होती।

तभी भगवान जगन्नाथ की कृपा से वे बेकार समझी गई पत्तियां और डंडियां हरे-भरे वृक्षों में बदल गईं। पूरा कैलाश फूलों और फलों से भर गया।

जगन्नाथ जी बोले, सच्ची मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। उसका फल कभी-कभी हमारी अपेक्षा से अलग रूप में मिलता है, लेकिन मिलता अवश्य है।

तभी सब समझ गए कि भगवान पहले सबक देते हैं, फिर फल।

0/Post a Comment/Comments