पति ने फोन किया " शाम को मेरे परिवार के लोग आ रहे है। तुम कुछ अच्छा सा बना लेना।" पत्नी तुनक कर बोली " मुझसे नही होगा इतना सब? तुम उन्हे कही होटल मे ले जाओ और वहीं से विदा कर देना।" पति बोला " तुम मुझे उनके साथ नही रहने देती मगर साल मे एक बार तो उन्हे सहन कर लो"
पत्नी ने कोई जवाब नही दिया। रात आठ बजे घर की डोर बेल बजी। पत्नी ने दरवाजा खोला तो आश्चर्य चकित रह गई। गेट पर उसके माता पिता, भाई-भाभियाँ और उनके बच्चे खड़े थे। "
उसने खाने मे कुछ भी नही बनाया था। क्योंकि वो समझ रही थी कि उसके पति के परिवार वाले आ रहे हैं। तुरंत उसने पति को फोन किया " कहाँ हो? अभी तक ड्यूटी से घर क्यों नही आये? तुमने पहले क्यों नही बताया मेरे परिवार वाले आ रहे है?
अब उन्हे इतनी रात को क्या बनाकर खिलाऊँ?" मै तो बाजार से कुछ भी नही लाई? तुम ऐसा करो अभी होटल से कुछ लेकर घर पहुंचों। " पति बोला " जो घर मे है वही खिला दो। मै शहर मे नही हूँ। मैने अपने परिवार के साथ चार दिन का घूमने का प्लान बनाया है उन्हे के साथ एक हिल स्टेशन के होटल मे हूँ। तुझे सबक सिखाने के लिए मैने ही तुम्हारे परिवार को सरप्राइज पार्टी के लिए बुलाया है।
उनको ज्यादा कुछ नही बताना वरना मै सारी पोल खोल दूंगा। अपने परिवार के साथ इंजॉय करो। मै भी कर रहा हूँ। एक बात याद रखना। जब तक मेरे परिवार को अपना नही समझोगी मै भी तुम्हारे परिवार को अपना नही समझुँगा। चार दिन बाद मिलते हैं बाय!!
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