इस पेड़ में कूट-कूट कर भरे हैं औषधीय गुण, डायबिटीज के लिए रामबाण! फल, छाल-पत्ते, बीज भी औषधि


हल्दू का वृक्ष, फल, फूल और छाल कई औषधीय गुणों से भरपूर है, जिसका उल्लेख सुश्रुत जैसे ग्रंथों में किया गया है. आयुर्वेद के मुताबिक, इसका फल शरीर के तीनों दोष (वात, कफ, पित्त) को कंट्रोल करने वाला है. हल्दू के फल की तासीर कड़वी होती है और इसमें मौजूद गुण शरीर की कई गंभीर समस्याओं के लिए रामबाण इलाज हैं.

हल्द्वानी. हल्द्वानी शहर को कुमाऊं का गेटवे कहा जाता है. यह शहर कभी छोटा सा कस्बा हुआ करता था, जहां हल्दू के पेड़ बहुत अधिक संख्या में थे. माना जाता है कि हल्दू के पेड़ों की वजह से इस शहर का नाम हल्द्वानी पड़ा. प्राचीन समय में इस नगर को हल्दीवन व हल्दूवन के नाम से जानते थे. आज हम बात करेंगे इन्ही हल्दू के पेड़ों की जिसे मई वृक्ष भी कहा जाता है. हल्दू के पेड़ को उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में कदम्ब के नाम से जानते हैं. इसके फल और बीज औषधीय गुणों से भरपूर होते है. इस पेड़ के छाल और पत्तियों से बनाई गई औषधियां कई चिकित्सीय लाभ प्रदान करती हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार हल्दू का सेवन करने से लीवर की समस्याओं को दूर किया जा सकता है. हल्दू का वृक्ष, फल, फूल और छाल कई औषधीय गुणों से भरपूर है, जिसका उल्लेख सुश्रुत जैसे ग्रंथों में किया गया है. आयुर्वेद के मुताबिक, इसका फल शरीर के तीनों दोष (वात, कफ, पित्त) को कंट्रोल करने वाला है. हल्दू के फल की तासीर कड़वी होती है और इसमें मौजूद गुण शरीर की कई गंभीर समस्याओं के लिए रामबाण इलाज हैं. इसके फल में बीज होते हैं जो आमतौर पर खाए जाते हैं. हल्दू एक सुंदर और उपयोगी पेड़ है जो विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है और उसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है. यह पेड़ चिकित्सीय, खाद्य और अन्य उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण है.

डायबिटीज के रोगियों के लिए रामबाण
वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ़ विनय खुल्लर ने बताया कि हल्दू का पेड़ ब्लड शुगर के मरीजों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है. इसके जड़ और छाल में एंटी ब्लड शुगर तत्व पाए जाते हैं. इसके पत्तों में मेथनॉलिक अर्क मौजूद होता है, जो बढ़े हुए ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में कारगार होता है. ऐसे में डायबिटीज के रोगियों को इसके फल, फूल और जड़ों का सेवन अवश्य करना चाहिए. हल्दू का पेड़ पेट से संबंधित अनेक समस्याओं जैसे उल्टी, लूज मोशन आदि के उपचार में फ़ायदेमंद है. यह हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है. इस पेड़ में क्लोरो जेनिक एसिड होता है जो एक तरह का एंटी हेपेटोटॉक्सिक है. इस पेड़ का आर्क लिवर संबंधित समस्याओं को दूर करता है.

अस्थमा के उपचार में कारगर है हल्दू
डॉ़. विनय ने बताया कि हल्दू का पेड़ किसी भी तरह का सूजन और दर्द दूर करने के लिए कारगार उपाय है. आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है. इसके लिए आप इसकी पत्तियों को थोड़ा गर्म कर सूजन या दर्द वाले स्थान पर बांध लें, इस पेड़ के अर्क का इस्तेमाल करके एक पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा रोग ठीक होते है. इसके साथ ही हल्दू के पत्तों का रस निकाल करके नाक में डालने से अस्थमा का उपचार भी किया जाता है.

जैव विविधता के लिए भी उपयोगी
डॉ़. विनय ने बताया कि हल्दू का पेड़ जैव विविधता के लिए बेहद उपयोगी है. सामान्य पेड़ों की अपेक्षा यह पेड़ कई गुना अधिक शुद्ध हवा देता है. इसमें पक्षियों अपना आवास बनाती हैं. लंगूर, बंदर, गिद्दों व चील भी इस पेड़ में बैठा करते हैं. हल्दू के पेड़ की पत्तियां चारे के लिए उपयोग में लाई जाती हैं और टहनियां जलाने के काम आती हैं.

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