परिधि बाथरूम से फ्रेश होकर बाहर निकली तो अपने कमरे का नजारा देख कर हैरान रह गयी...


परिधि बाथरूम से फ्रेश होकर बाहर निकली तो अपने कमरे का नजारा देख कर हैरान रह गयी। फर्श पर उसका सूटकेस और बैग खुला हुआ था और उसके अंदर रखे कपड़े और सामान सब अस्त-व्यस्त हो रखे थे और पास ही बैठी दोनों ननदे कुछ खोज रही थी।

"ये तुम दोनों मेरे सूटकेस और बैग में क्या खोज रही हो? तुम दोनों का सभी सामान मैनें पहले ही निकाल कर दे दिया है" परिधि ने तनिक रोष से पूछा।

परिधि को सामने देख पहले तो दोनों सकपका गयी फिर तुरंत ही बहाने बना बड़ी ननद सीमा बोली, "भाभी, भैया ने ही कहा कि उन्होनें मेरे लिए एक ब्लैक कलर की ड्रेस ली लेकिन बैग में नहीं था तो सोचा कि आप देना भूल गयी होंगी इसलिये वही ड्रेस खोज रही थी।"

"ड्रेस मिला?" परिधि ने गुस्से से देखते हुए पूछा।

"ऊंह हह!! नहीं भाभी ब्लैक ड्रेस तो नहीं मिला लेकिन एक रेड कलर का वनपीस दिखा वो किसका है। बहुत खूबसूरत है और मुझ पर बहुत खिलेगा... मैं ले लूं? छोटी ननद रीमा दांत निपोड़ते हुए बोली।

"अरे पूछना क्या? मना क्यों करेगी... वैसे भी तेरी भाभी अब यहां ये सब कपड़े थोड़ी ना पहनेगी... भाभी के सामान और कपड़े पर ननद का हक़ होता है इसलिए तुम दोनों हक़ से ये ड्रेस रख लो" दरवाजे पर सासूमां लाजवंती जी ने चाशनी घोलते हुए स्वर में कहा और वो ड्रेस देखते ही देखते बिना परिधि की मर्जी पूछे बगैर ननदों को दे दिया गया और फिर बैग में से खोजबीन करके दोनों को जो भी सामान अच्छा लगा ले लिया।

परिधि की शादी को अभी एक महीना ही हुआ था। रस्मो-रिवाजों को खत्म होने और सारे रिश्तेदारों के जाने के बाद परिधि अंशुल के साथ एक हफ्ते का हनीमून करके आज ही लौटी है। वो फ्रेश होने गयी इतने में उसके पीछे उसकी दोनों ननदों ने सूटकेस और बैग खोलकर जो पसंद आया बिना पूछे ले लिया।

सास और ननदों के जाने के बाद परिधि सूटकेस और बैग में बाहर फैला सामान रखने लगी तो उसने देखा कि उसका डीएसएलआर कैमरा तो गायब है। उसने सब सामान अच्छे से उलट-पुलट कर देख लिया और अपना हैण्डबैग भी लेकिन कैमरा कहीं नहीं था। परिधि को फोटो खिंचने का बहुत शौक है इसलिए उसने फोटोग्राफी का कोर्स भी किया था। अपने पापा से उसने यही एक चीज मांगी थी जब उसने ग्रेजुएशन में टॉप किया था।

हनीमून पर भी वो कैमरा ले गयी थी। उसमें हनीमून ट्रिप की बहुत खूबसूरत तस्वीरे थी और कुछ तो उसकी और अंशुल की अंतरंग पलों की तस्वीरे थी। जिसमें उसने रेड वनपीस पहना था।

परिधि रोते हुए अंशुल को फोन लगाकर बताती है कि कैमरा नहीं मिल रहा। अंशुल उसे चुप रहने को कहता है और साथ ही यह आश्वत करता है कि कैमरा सूटकेस में ही होगा क्योंकि उसने खुद उसे कपड़ों के बीच रखा था।

परिधि एक बार फिर सूटकेस और बैग चेक करती है और चीजों को याद करने की कोशिश करती है। उसे ध्यान आता है कि जब तक सीमा-रीमा कमरे में थी कैमरा भी वही था लेकिन उनके कमरे से बाहर जाने के साथ ही कैमरा गायब था।

परिधि ननदों के कमरे में जाती है और अंदर की आवाज सुन बाहर ही रुक जाती है। अंदर से दोनों ननदों के धीरे-धीरे हंसने और फुसफुसाने की आवाज आ रही थी,"वॉव भाभी कितनी सेक्सी लग रही है इस ड्रेस में... अरे भैया को भी देख क्या लग रहे? अरे भाभी के गले में यह डायमंड की नेकलेस लग रही लगता है भैया ने हम सबसे छुपाकर यह भाभी को हनीमून गिफ्ट दिया है, मम्मी को बताना पड़ेगा..."

यह सब सुनकर परिधि को बहुत गुस्सा आ गया और वो अगले ही पल सीमा-रीमा के सामने खड़ी थी। उसे देख सीमा के हाथ से कैमरा छूट कर गिरने ही वाला था तभी परिधि ने कैमरा पकड़ लिया। परिधि ने गुस्से से पहले कैमरा देखा और फिर सीमा-रीमा को और फिर... एक जोरदार चटाक की आवाज के साथ सीमा अपना गाल पकड़कर रोने लगी। परिधि अपना कैमरा लेकर अपने कमरे में आ गयी और आने वाले तूफान का इंतजार करने लगी।

"बहू तुम्हारी हिम्मत कैसे हुयी अपनी ननद पर हाथ उठाने की... क्या यही संस्कार सिखा कर मायकेवालों ने भेजा है। आने दो अंशुल को आज ही तुम्हारा सूटकेस बंधवाकर तुम्हें मायके भेजती हूं" लाजवंती जी की आंखों से अंगारे बरस रहे थे।

"संस्कार की बात तो मम्मीजी आप न ही करिये तो अच्छा है।बिना पूछे किसी का सामान खोलकर तलाशी लेना किस संस्कार में सिखाया जाता है। बिना सामने वाले की मर्जी पूछे बिना उसका सामान ले लेना किस संस्कार में पढ़ाया जाता है और किस संस्कार में यह बेहूदगी सिखायी जाती है कि अपने ही भैया-भाभी के प्राईवेट पिक्चर पर अनाप-शनाप कमेंट करो। मेरे संस्कारों की दुहाई देने से अच्छा है मम्मीजी कि आप अपनी बेटियों को कुछ संस्कार और मर्यादा में रहना सिखाए क्योंकि एक न एक दिन इन्हें भी ससुराल जाना है और अपनी जैसी या इनसे भी तेज ननदों का सामना करना है" परिधि की बातों को सुनकर लाजवंती जी ने गुस्से से सीमा-रीमा को देखा और उन्हें लेकर कमरे से बाहर आ गयी।

"मम्मी, आपको यूं भाभी की बात सुनकर नहीं आना चाहिए था, आने दो भैया को सब बताऊंगी" सीमा लाजवंती जी पर गुस्सा होने लगी। तभी सीमा के गाल पर फिर एक चटाक की आवाज आयी और इस बार लाजवंती जी थी, "सही कहा बहू ने... तुम बेटियों के प्यार में अंधी होकर गलत संस्कार दे रही थी।" लाजवंती जी ने सोच लिया कि अब इस घर में किसी के साथ गलत नहीं होगा।

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