गर्मी में मिलने वाली इस साधारण सब्जी में छिपा है सेहत का खजाना, पत्ता, बीज और फल संजीवनी बूटी से कम नहीं

परवल का फल, बीज और पत्तियां शरीर के लिए बेहद लाभकारी है, अगर इसके सेवन की बात करें तो 5 ml परवल के पत्ते का रस, 10 से 30 ml काढ़ा या 1 से 3 ग्राम इसके बीज के चूर्ण या इसके फल की सब्जी बनाकर सेवन किया जा सकता हैं.

गर्मी के मौसम में परवल की सब्जी मार्केट में आपको आसानी से मिल जाएगी. इस मौसम में ज्यादातर लोग परवल की सब्जी खाना पसंद करते हैं. कुछ जगहों पर परवल को पटोल भी कहा जाता है. इसकी भुजिया या ग्रेवी वाली सब्जी बनाई जाती है. परवल में विटामिन ए, विटामिन बी1, विटामिन बी2 और विटामिन सी की अच्छी मात्रा पाई जाती है. परवल की सब्जी डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है.

आयुर्वेद के अनुसार इस सब्जी का हर अंग संजीवनी बूटी के समान माना गया है. काढ़ा, चूर्ण या सब्जी के रूप में उपयोगी यह परवल अनेक रोगों को जड़ से खत्म करने में कामयाब सिद्ध होता है. इसे भोजपुरी में परोरा के नाम से जानते हैं. ब्लड शुगर, फोड़े-फुंसी, पेट से संबंधित रोग जैसी तमाम समस्याओं के इलाज में में यह बेहद कारगर है. चरक संहिता से लेकर सुश्रुत संहिता ने भी परवल का खूब वर्णन किया है.

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की 07 साल अनुभवी (MD और पीएचडी इन मेडिसिन) चिकित्साधिकारी डॉ. प्रियंका सिंह ने लोकल 18 को बताया कि आयुर्वेद के अनुसार, परवल किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है. चरक संहिता के आसव योनि में परवल के पत्तों का वात पित्त नाशक के रूप में वर्णन आया है, यही नहीं सुश्रुत संहिता ने तो इसके हर अंग को ही औषधि बताया गया है.

डॉ. प्रियंका ने बताया कि यह अनेक बीमारियां के इलाज में कारगर है. परवल का प्रयोग नेत्र रोग, मुखरोग, डायबिटीज, उल्टी दस्त, पीलिया, कब्ज, फोड़े फुंसी का दर्द, कुष्ठ रोग, दर्द और जलन,, रक्तपित्त, वजन, पाचन तंत्र, कोलेस्‍ट्रॉल, ब्‍लड शुगर, शराब की आदत से निजात , खून साफ करना और पेट की चर्बी जैसी तमाम बीमारियों में किया जाता है.

डॉ. प्रियंका ने बताया कि परवल का फल, बीज और पत्तियां शरीर के लिए बेहद लाभकारी है, अगर इसके सेवन की बात करें तो 5 ml परवल के पत्ते का रस, 10 से 30 ml काढ़ा या 1 से 3 ग्राम इसके बीज के चूर्ण या इसके फल की सब्जी बनाकर सेवन किया जा सकता हैं. वैसे में इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन फिर भी अगर किसी बीमारी से ग्रसित है तो बिना आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लिए हुए इसका सेवन न करें, क्योंकि उम्र और बीमारी के हिसाब से सही मात्रा एक आयुर्वेद एक्सपर्ट ही बता सकता है.

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