मोहन और सुधा की शादी को अभी बमुश्किल तीन महीने ही पूरे हुए थे कि अचानक सुधा की कमर में दर्द उठा ....


मोहन और सुधा की शादी को अभी बमुश्किल तीन महीने ही पूरे हुए थे कि अचानक सुधा की कमर में दर्द उठा ....अस्पताल में डाक्टरों द्वारा किए कुछ एक्सरे और टेस्ट के परिणाम स्वरूप पता चला उसकी रीढ की हड्डी में कुछ प्रोब्लम है जिसके लिए उसे फिलहाल बेडरेस्ट करना जरूरी है अन्यथा परेशानी अधिक बढ जाएगी .....

डाक्टरों के दिशा निर्देश अनुसार सुधा को बेडरेस्ट दिया गया इसलिए साथ मे कामकाज में हाथ बंटाने वाली सासूमां को सारे घर का काम अकेले करना पड रहा था

सुधा का हालचाल लेने और बेटी से मिलने आए उसके मम्मी पापा ने जब ये सब देखा तो उन्होंने आग्रह पूर्वक मोहन की माताजी से कहा..... बहनजी ....आप सुधा को हमारे साथ भेज दीजिए जब ये स्वस्थ हो जाएगी तो हम सुधा को वापसी भेज देगे .....

जबाब मे मोहन की माताजी ने जो कहा वो सुनकर सुधा के माता पिता सहित बेड पर लेटी सुधा की आँँखे भी उनके सम्मान में खुशी से भीग गई ....

जानते है दोस्तों उनका जबाब कया था ....

मोहन की माताजी ने कहा.... भाईसाहब ...बहनजी ....मे अपने घर के लिए गृहलक्ष्मी लेकर आई हूं जो इस परिवार का अब अहम हिस्सा है मे बेटी लेकर आई हूं कोई काम करनेवाली नौकरानी नहीं ....आज यदि वह दुख मे परेशानी में है तो उसे यही सुख दुख साझा करने दीजिए ....ये जीवन का एक अनोखा मगर सत्य का आइना दिखाने वाला समय है हमें हमारी बेटी के पास रहने दीजिए ये घरपरिवार अब उसके जीवन का हिस्सा है और यही ऐसी परेशानी कल मेरे साथ या मेरे बेटे के साथ भी हो सकती है तब सब उसीको तो संभालना है ....एक परिवार का अर्थ यही होता है साथ मे एकदूसरे के सुख दुख मे साथी बनो ....

आप बेफिक्र होकर जाइए ....और जबभी मन करें सुधा से मिलने आइए मगर सुधा अब इस परिवार की बेटी है वो यही रहेगी अपनी इस मां इस अपने परिवार के साथ... कहकर दोनों हाथ जोड दिए ....

सुधा के माता पिता के साथ साथ बेड पर आराम कर रही सुधा की आँँखे भी सासूमां के सम्मान में भीग रही थी ...!!

पोस्ट पसंद आये तो फॉलो करना प्लीज 

0/Post a Comment/Comments