आरव ने बताया, "प्यार, रोमांस, और शारीरिक आकर्षण तो एक दिन खत्म हो जाएगा, लेकिन हमारा साथ हमेशा रहेगा।" उनकी यह बात सुनकर मुझे डर लगता था


23 साल की उम्र में मेरी शादी हो गई थी। आरव एक बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे। आरव का कहना था कि मेरी पत्नी सिर्फ समाज के लिए नहीं, बल्कि मेरे लिए एक दोस्त से ज्यादा होनी चाहिए, क्योंकि हमें साथ में पूरी जिंदगी बितानी है।

आरव ने बताया, "प्यार, रोमांस, और शारीरिक आकर्षण तो एक दिन खत्म हो जाएगा, लेकिन हमारा साथ हमेशा रहेगा।" उनकी यह बात सुनकर मुझे डर लगता था कि कहीं हमारी शादी के बाद हमारा रिश्ता ना टूट जाए।

लेकिन ऐसा नहीं था। आरव मुझे भरपूर प्यार देते थे और एक स्त्री की सभी जरूरतों जैसे शारीरिक और मानसिक हर चीज का ध्यान रखते थे।

आरव के अच्छे होने का सबसे बड़ा कारण था मेरे माता-पिता का अच्छा होना। शादी के बाद जब मैं ससुराल गई, तो चूल्हे की रस्म में कुछ मीठा बनाना था। घबराहट के कारण मैंने हलवा खराब बना दिया था। मां को यह बात पता चली, तो उन्होंने उस हलवे में से एक निवाला निकालकर भगवान को भोग लगाया। फिर उन्होंने तुरंत जुटकर नया हलवा बनाने में लग गईं और बहुत अच्छा हलवा बना कर मुझे बोला, "सभी मेहमानों को खिला दो।"

बाहर आकर उन्होंने खुद कहा, "भाई-बहू की पहली रसोई है, काफी मेहनत के साथ इसने सब किया है। अब खा कर बताओ कैसा लगा।" मुझे खुशी हुई। पूरे दिन के काम के बाद जब मैं थक कर अपने कमरे में गई, तो सो गई।

सुबह उठते ही देखा तो ६:३० पर नींद खुली। कमरे से निकलकर जल्दी-जल्दी नहा कर किचन में आई तो देखा पापा चाय छान रहे थे। उन्हें यह करते देखकर मैं शर्मिंदा हो गई और डर से बोली, "पापा जी, सॉरी मुझे लेट हो गया।"

उन्होंने तुरंत बोला, "लेट कहाँ हुआ है, आओ चाय पियो।" और उन्होंने कहा कि चाय बनाने का काम शुरू से मेरा है। आज की चाय खास है क्योंकि मैं अपनी बेटी के साथ पी रहा हूँ, क्योंकि आरव की कोई बहन नहीं थी।

आरव तो अच्छे थे, लेकिन उनके मम्मी-पापा उनसे भी अच्छे थे। मेरा जन्मदिन था और यह मेरे लिए खास मौका था। शादी को मात्र ७ महीने हुए थे। आरव चाहते थे कि जन्मदिन सेलिब्रेशन में किसी चीज की कमी ना हो।

मेरे पापा ने आरव के दोस्त को फोन किया और बोला, "२ घंटे से कहा गया समान लेने, अभी तक नहीं आया।" तब सबकी चिंता बढ़ने लगी। पापा और आरव के दोस्त घर से बाहर निकले पता लगाने। कुछ दूर जाने के बाद पता चला कि फूल की दुकान के सामने एक व्यक्ति को ऑटो वाले ने धक्का मार दिया, और वह चालक से टकरा गया। उसे अस्पताल ले जाया गया।

पापा और उनके दोस्त अस्पताल गए तो देखा वह आरव थे। उनका फोन २ तुकड़े में टूट गया था, पास में छोटी को देने के लिए एक बुके था। सब कुछ तो था, पर अब आरव नहीं थे। उनकी पसली टूट कर दिल में छेद कर दी थी, जिससे मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई।

मेरे साथ मेरा पूरा परिवार स्तब्ध था। इस सदमे से बाहर निकलने में मुझे २ साल का वक्त लगा। पर आज मेरे सास-ससुर चाहते हैं कि मैं अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करूं और शादी कर के अपना दुबारा घर बसाऊं, क्योंकि २७ साल की उम्र कोई ज्यादा नहीं है।

पर इस समाज को मेरा और मेरे माता-पिता का दुख नहीं दिखता। एक विधवा या तलाकशुदा लड़की से कोई शादी नहीं करना चाहता क्योंकि शादी के बाद संभोग कर के वो अपवित्र है। वहीं, वही लड़की जो बिना शादी के १०-१० लोगों के साथ संबंध बनाती है और फिर पतिव्रता बन जाती है, उसे समाज आसानी से स्वीकारता है।

हां, मेरे और आरव के बीच शारीरिक संबंध थे और बहुत अच्छे थे, क्योंकि हमारी शादी हुई थी। पर आज आरव मेरे साथ नहीं हैं, तो इसमें मेरी क्या गलती है? क्यों ये समाज किसी विधवा और तलाकशुदा लड़की को अपना घर ठीक से दुबारा बसाने नहीं देता?

शादी के बहुत से ऑप्शन हैं, लेकिन २७ साल की लड़की को ४० साल के आदमी मिलते हैं। पर यही कोई स्त्री की मृत्यु होती तो उसके पति को तुरंत नई लड़की मिल जाती।

सीख:

समाज में महिलाओं के प्रति धारणाएँ अक्सर अनुचित होती हैं। विधवा या तलाकशुदा महिलाओं को सम्मान और पुनर्वास का अवसर मिलना चाहिए। हर महिला की जिंदगी में सम्मान और समर्थन की आवश्यकता होती है, न कि पूर्वाग्रह और तिरस्कार की। हमें समाज में समानता और समझदारी को बढ़ावा देना चाहिए ताकि हर व्यक्ति को खुशहाल जीवन जीने का अवसर मिल सके।

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