अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने बैंक ऑफ बड़ौदा के एक सजग मैनेजर की सूझबूझ से इस गिरोह के मुख्य सदस्य 'मोहम्मद अमजद' को गिरफ्तार किया है!
यह गिरोह हमारे घर के सीधे साधे बुजुर्गों की लाचारी को अपना शिकार बनाता था!
इस पूरे स्कैम का गेम प्लान को इतनी सोची समझी थी कि कोई भी बुजुर्ग इसमें आसानी से फंस जाता था!
जरा इस गिरोह के ठगी करने के घिनौने तरीके को समझिए!
अस्पताल और सत्संग में जाल यह गैंग स्पेशली ऐसे बुजुर्गों को ढूंढता था जिन्हें चलने फिरने या घुटनों में भयंकर दर्द की समस्या होती थी!
ये लोग अस्पतालों पार्कों या सत्संग के बाहर खड़े हो जाते थे और बुजुर्गों से हमदर्दी जताकर उनकी सेवा करने का नाटक करते थे!
फर्जी गवाहों का खेल जब बुजुर्ग इन पर भरोसा करने लगते तो गिरोह का ही एक दूसरा बंदा आकर कहता कि — अरे बाबूजी मेरे माता-पिता को भी यही दर्द था, वो तो 'डॉक्टर दीवान' के पास जाते ही तुरंत ठीक हो गए!
विश्वास पक्का करने के लिए ये लोग फोन पर नकली मरीजों से बात भी करवाते थे!
नकली डॉक्टर और सुई का खेल जब डरा हुआ बुजुर्ग उस नकली डॉक्टर के पास पहुंचता तो डॉक्टर और उसका असिस्टेंट बुजुर्ग के पैरों में चुपके से कोई सुई चुभाते थे और फिर सिरिंज से पैर के अंदर से गहरा 'काला खून' (ब्लॉक ब्लड) बाहर निकालते थे!
एक-एक बूंद की कीमत ₹7,000 पैर से काला खून निकलता देख बुजुर्ग डर जाता था कि उसके शरीर में कितना ज़हर फैला है!
इसी डर का फायदा उठाकर वो नकली डॉक्टर दावा करता कि ये 'ब्लॉक ब्लड' है और इसे बाहर निकालना होगा!
वो हर एक ड्रॉप (बूंद) बाहर निकालने के बदले बुजुर्ग से ₹7,000 वसूलते थे!
सोचिए एक बार में लाखों रुपए की ठगी!
₹15 लाख तक की लूट एक पीड़ित बुजुर्ग तो इस जाल में ऐसा फंसा कि बाकी डॉक्टरों से इलाज न मिलने की हताशा में उसने इस नकली डॉक्टर को कुल ₹15 लाख रुपए दे डाले!
गिरोह का एक सदस्य उस बुजुर्ग का विश्वास जीतकर बार बार उसे बैंक ले जाता और पैसे निकलवाता था!
बैंक मैनेजर की सूझबूझ से फूटा घड़ा
इस स्कैम का पर्दाफाश तब हुआ जब बैंक ऑफ बड़ौदा के एक मैनेजर को शक हुआ कि एक बुजुर्ग अपनी 'FD' फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर लगातार बड़े-बड़े अमाउंट में कैश क्यों निकाल रहा है?
मैनेजर ने जब बुजुर्ग के साथ आए उस संदिग्ध युवक को देखा, तो तुरंत पुलिस को अलर्ट कर दिया और सारा मामला शीशे की तरह साफ हो गया!
यह घटना हम सभी के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है!
अपराध की शुरुआत हमेशा 'भरोसे' से ही होती है!
हमारे बुजुर्ग दर्द से परेशान होकर किसी भी चमत्कारिक इलाज पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं और ऐसे दरिंदे उनकी ज़िंदगी भर की कमाई लूट लेते हैं!
मैं अहमदाबाद पुलिस और उस जागरूक बैंक मैनेजर को सलाम करता हूँ जिनकी वजह से यह गिरोह पकड़ा गया!
लेकिन देश के कोने-कोने में ऐसे कई 'डॉक्टर दीवान' आज भी घूम रहे हैं!
सरकार और प्रशासन को ऐसे फर्जी क्लिनिकों के खिलाफ एक बड़ा देशव्यापी अभियान चलाना चाहिए! #treding
Post a Comment