Right Way To Make Buttermilk at Home: शहर में रोज-रोज छाछ कहां से लाएं? तो ऋतु अक्सर इस चिलचिलाती गर्मी में घर में जमाए दही में ही पानी मिलाकर उससे छाछ बना लेती है. ये छाछ वो अपने और अपने पति के टिफिन में साथ में कैरी करती है. क्या आप भी ऋतु की तरह ही घर में जमे दही में पानी डालकर उसे मिक्सी में ब्लैंड कर या हाथों से ही मथकर पतली छाछ बना लेते हैं? अगर हां, तो आपको बता दें कि आप इतने समय से छाछ नहीं पी रही हैं. बल्कि आप छाछ के धोखे में असल में सिर्फ पतला दही ही पी रही हैं. यूट्यूब पर भी कई होम कुक्स दही को मिक्स में फेंट, उसमें कई मसाले मिलाकर ‘मसाला छाछ’ की रेसिपी सिखा रहे हैं. लेकिन आयुर्वेद की दृष्टि से न तो ये छाछ है और न ही इससे आपको ‘ताक’ जैसे फायदे मिलने वाले हैं.
दही या छाछ, गर्मी में क्या है ज्यादा फायदेमंद
दरअलस पूरी तरह से घी निकाल कर तैयार किया गया छाछ बहुत हल्का और पथ्य (हितकर) माना गया है. ये छाछ शरीर के लिए आयुर्वेद में ‘अमृत’ कही गई है. वहीं घी निकाले बिना दूध को जमाकर तैयार दही बहुत भारी (गरिष्ठ), बलकारी और कफकारक होता है. छाछ को जब मथा जाता है तो इस प्रक्रिया में उसके प्रोटीन टूटते हैं और पानी मिलने से हल्का हो जाता है. छाछ गट हेल्थ के लिए एक रामबाण औषधि होती है. इसे पीने से गट में गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं.
दही में पानी डालने से नहीं बनती छाछ
मेरे पास कई लोग आकर बताते हैं कि वो राज छाछ पीते हैं. लेकिन जब उनसे पूछो कि वो कैसे छाछ पीते हैं तो वो बताते हैं कि दही में पानी डालकर उसे फेंटकर छाछ बना ली और रोज पीते हैं. असल में दही में पानी मिलाकर उसे फेंटने से छाछ नहीं बनती और अगर आप ऐसे छाछ पी रहे हैं तो आप छाछ नहीं पी रहे. छाछ, दही मथकर ही बनती है. पर असल में छाछ से मक्खन निकालने के बाद जो बचता है उसे ही छाछ कहते हैं. गांव में तो छाछ आसानी से मिल जाती है. लेकिन अगर आप शहरों में रह रहे हैं तो आसान तरीके से आप घर में भी छाछ बना सकते हैं. इसके लिए आप डबल टोन मिल्क या घर के दूध से 2 बार मलाई निकालने के बाद दही जमाएं. इस दही से जब आप छाछ बनाएंगे तब वह सही छाछ होगी. आप इस छाछ को पी सकते हैं
एसडिटी हो तो न पीएं छाछ
डॉ. सुनील आर्या बातते हैं, लोगों में एक गलतफहमी है कि छाछ ठंडी होती है. लेकिन असल में दही और छाछ दोनों की प्रकृति गर्म होती है. साथ ही ये पित्त कारक भी होती है. अगर किसी को एसिडिटी हो तो उसे उस समय दही या छाछ नहीं पीनी चाहिए. दरअसल छाछ पाचन तंत्र के लिए बहुत गुणकारी है. वह शरीर में गुड बैक्टेरिया को बढ़ाता है. खाना खाने के बाद छाछ पीना अमृत समान है. क्योंकि ये शरीर में एसिड बढ़ा देती है जिससे पाचन की प्रक्रिया अच्छी होती है, लेकिन इसी वजह से जब एसिडिटी हो तब छाछ नहीं पीनी चाहिए.
B12 भी देते हैं छाछ और दही
डॉ. आर्या बातते हैं कि यदि पेट में अपच हो, पेट में आव बनती हो, ठीक से पाचन नहीं हो रहा हो, खाना खाने के बाद बार-बार जाना पड़ता हो, तब छाछ का सेवन शरीर के लिए अच्छा होता है. बल्कि छाछ और दही से कुछ हद तक विटामिन B12 मिलता है. खाने के बाद छाछ पीना चाहिए. लेकिन छाछ का सेवन सूर्यास्थ से पहले करना चाहिए.
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