ग्रहीय गणनाओं के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति के अस्त होते ही ब्रह्मांडीय ऊर्जा में एक बड़ा नकारात्मक फेरबदल होने जा रहा है। इस गोचर काल में 4 विशेष राशियों की मुश्किलें काफी बढ़ने वाली हैं। इन जातकों को करियर में अड़चनें, पैसों की तंगी, मतिभ्रम और पारिवारिक क्लेश का सामना करना पड़ सकता है।
आइए जानते हैं कि गुरु बृहस्पति के अस्त होने से किन 4 राशियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और इस अशुभ प्रभाव से बचने के अचूक ज्योतिषीय उपाय क्या हैं:
गुरु के अस्त होने से इन 4 राशियों के जीवन में आ सकती हैं बड़ी अड़चनें
1. मेष राशि (Aries) — भाग्य का साथ छूटेगा, बनते काम अटकेंगे
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का अस्त होना उनके भाग्य भाव को कमजोर करेगा, जिससे लंबे समय से चल रही राहत पर थोड़ा विराम लग सकता है।
करियर व ऑफिस में दिक्कत: दफ्तर में आपके सीनियर्स या बॉस के साथ किसी बात को लेकर तीखी बहस हो सकती है। आपकी मेहनत का श्रेय किसी और को मिलने से मन खिन्न रहेगा। इस अवधि में नई नौकरी के लिए जल्दबाजी में कोई वित्तीय जोखिम न लें।
आर्थिक व पारिवारिक स्थिति: धन का आगमन अचानक धीमा हो सकता है, जिससे दैनिक खर्चे पूरे करने में परेशानी आएगी। घर के छोटे-छोटे मुद्दों पर जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद गहरे हो सकते हैं।
2. मिथुन राशि (Gemini) — व्यापार में मंदी और प्रॉपर्टी के विवाद
बुध की राशि मिथुन के जातकों के लिए गुरु देव का अस्त होना उनकी निर्णय क्षमता और व्यावसायिक सूझबूझ को प्रभावित करेगा।
करियर व व्यापार: जो लोग पार्टनरशिप में बिजनेस करते हैं या बड़ा निवेश करने की सोच रहे हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। व्यापार में कोई भी नया सौदा दस्तावेजों को बिना पढ़े फाइनल न करें।
प्रॉपर्टी व क्लेश: पैतृक संपत्ति या जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने मामले फिर से उभर सकते हैं, जिससे परिवार में अशांति और क्लेश का माहौल बनेगा।
3. तुला राशि (Libra) — आर्थिक तंगी और मानसिक अशांति
तुला राशि के जातकों के लिए गुरु का अस्त होना वैवाहिक जीवन और संचित धन (सेविंग्स) के मोर्चे पर कड़ी परीक्षा लेने आ रहा है।
आर्थिक झटका: इस समय किसी को भी बड़ा उधार या कर्ज देने से बचें, वह पैसा हमेशा के लिए डूब सकता है। शेयर मार्केट या जोखिम भरी योजनाओं में शॉर्टकट से पैसा कमाने की प्रवृत्ति का पूरी तरह त्याग कर दें।
पारिवारिक क्लेश: जीवनसाथी या प्रेम साथी के साथ संवादहीनता (Communication Gap) के कारण गलतफहमियां चरम पर होंगी, जिससे रातों की नींद उड़ सकती है।
4. धनु राशि (Sagittarius) — करियर में अड़चनें और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं
धनु राशि के स्वामी स्वयं देवगुरु बृहस्पति ही हैं। अपनी ही राशि के स्वामी का अस्त होना आपके आत्मबल और शारीरिक ऊर्जा को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
करियर व ऑफिस में दिक्कत: दफ्तर की गंदी राजनीति (Office Politics) का आप सीधे शिकार हो सकते हैं। बिना वजह किसी दूसरे की गलती का ठीकरा आपके सिर पर फूट सकता है, जिससे आपकी साख प्रभावित होगी।
स्वास्थ्य व तनाव: मानसिक अशांति के साथ-साथ पेट, लीवर या मोटापे से जुड़ी पुरानी बीमारियां फिर से परेशान कर सकती हैं।
देवगुरु बृहस्पति के अशुभ प्रभाव से बचने के 3 अचूक उपाय
गुरु देव जब अस्त हों, तो साक्षात भगवान श्रीहरि विष्णु (जो बुद्धि के प्रदाता और सृष्टि के पालनहार हैं) की शरण में जाने से सभी संकट पल भर में टल जाते हैं:
विष्णु सहस्रनाम का पाठ या श्रवण: गुरु जनित मतिभ्रम और आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें या उसे सुनें। यह उपाय आपकी निर्णय क्षमता को अचूक बना देगा।
पीली चीजों का महा-दान: प्रत्येक गुरुवार को किसी मंदिर में जाकर या जरूरतमंदों को चने की दाल, केले, केसर, हल्दी या पीले वस्त्रों का दान करें। इसके साथ ही, घर के बड़ों, गुरुओं और पुरोहितों का आशीर्वाद अवश्य लें।
'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप: प्रतिदिन तुलसी की माला से इस महामंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें और माथे पर चंदन का तिलक लगाएं। इससे घर का पितृ दोष और गृह क्लेश हमेशा के लिए शांत हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. गुरु ग्रह के अस्त होने का मानव जीवन पर क्या व्यावहारिक प्रभाव पड़ता है? Ans. ज्योतिष में गुरु को विस्तार, बुद्धि और विवेक का ग्रह माना जाता है। जब गुरु अस्त होते हैं, तो व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिसके कारण वह गलत वित्तीय निर्णय ले लेता है। यही कारण है कि इस दौरान बड़े निवेश या नए व्यापार की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
Q2. क्या गुरु के अस्त होने के दौरान विवाह या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं? Ans. सनातन धर्म और विवाह शास्त्रों के अनुसार, जब गुरु या शुक्र ग्रह अस्त होते हैं, तो इसे 'तारा डूबना' कहा जाता है। इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्यों (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) के लिए शुभ मुहूर्त नहीं निकलते हैं, इसलिए इन कार्यों पर पूरी तरह विराम लग जाता है।
Comment Box में 'जय श्री हरी विष्णु' या 'जय लक्ष्मी नारायण' जरूर लिखें, सृष्टि के पालनहार आपके जीवन की सभी अड़चनें और आर्थिक तंगियां दूर करेंगे!
अस्वीकरण (Disclaimer)
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं, सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। हर व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति, महादशा, अंतर्दशा और वर्तमान गोचर का प्रभाव अलग हो सकता है, इसलिए किसी भी नतीजे पर पहुंचने या कोई भी बड़ा वित्तीय व व्यावहारिक निर्णय लेने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या योग्य ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
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