पत्नी पर शक ने पिता को बना दिया हैवान, 11 महीने की बेटी को पटककर मार डाला, फिर मां-बाप ने रची झूठी कहानी

बेंगलुरु में 11 महीने की बच्ची की मौत का खौफनाक सच, पिता पर हत्या का आरोप

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां पत्नी के चरित्र पर शक के चलते हुए झगड़े में एक पिता पर अपनी ही 11 महीने की मासूम बेटी की हत्या करने का आरोप लगा है। बच्ची की मौत के बाद माता-पिता ने पुलिस को गुमराह करने के लिए उसे खटिया से गिरने की कहानी सुनाई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरा सच सामने ला दिया।

घटना पूर्वी बेंगलुरु के किथागनूर इलाके की बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी पिता की पहचान 22 साल के शेखप्पा के रूप में हुई है। वह मूल रूप से कर्नाटक के यादगीर जिले का रहने वाला है और बेंगलुरु में ट्रैक्टर ड्राइवर का काम करता है। शेखप्पा अपनी पत्नी विजयलक्ष्मी के साथ रहता था। दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। बताया जा रहा है कि आरोपी को अपनी पत्नी के चरित्र पर शक था और इसी वजह से घर में आए दिन झगड़े होते थे।

पुलिस जांच में सामने आया कि जून महीने में भी पति-पत्नी के बीच इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आरोपी ने अपनी 11 महीने की बेटी को पहले लात मारी और फिर उसे उठाकर फर्श पर पटक दिया। बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।

बच्ची की मौत के बाद माता-पिता ने पुलिस को बताया कि मां विजयलक्ष्मी बच्ची को दूध पिला रही थी। इसी दौरान उसे नींद आ गई और बच्ची करीब दो फीट ऊंची खटिया से नीचे गिर गई। इस बयान के आधार पर पुलिस ने शुरुआत में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

हालांकि, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो कहानी पर शक गहरा गया। रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर ऐसी चोटों के संकेत मिले, जो सामान्य रूप से खटिया से गिरने से नहीं हो सकते थे। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज की और पूछताछ में हत्या की परतें खुलने लगीं।

पुलिस के अनुसार, आरोपी पिता ने घरेलू विवाद के दौरान बच्ची को चोट पहुंचाई थी, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। वहीं, वारदात के बाद बच्ची की मां पर भी सच छिपाने और झूठी कहानी गढ़ने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मां की तलाश की जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि घरेलू कलह और शक की आग में सबसे ज्यादा कीमत अक्सर मासूम बच्चों को क्यों चुकानी पड़ती है। जिस बच्ची को माता-पिता की गोद में सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वही बच्ची घर के भीतर हुई हिंसा की शिकार हो गई।

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