यह कहानी बिहार के समस्तीपुर जिले के एक गुमनाम से गांव ताजपुर के मोतीपुर से शुरू होती है, जहां धूल और तंगहाली के बीच एक बाप अपनी अधूरी आंखों में बरसों पुराना जख्म छुपाए बैठा था ।


यह कहानी बिहार के समस्तीपुर जिले के

एक गुमनाम से गांव ताजपुर के मोतीपुर से

शुरू होती है, जहां धूल और तंगहाली के

बीच एक बाप अपनी अधूरी आंखों में बरसों

पुराना जख्म छुपाए बैठा था ।

संजीव सूर्यवंशी कभी खुद क्रिकेटर बनना

चाहते थे, लेकिन बिहार की बदहाल खेल

व्यवस्था और खाली जेब ने उनके सपनों का

गला घोंट दिया था, पर जब साल 2011 में

उनके घर बेटे वैभव का जन्म हुआ, तो

संजीव ने ठान लिया था कि जो गरीबी उनसे

जीती थी, उसे वो अपने बेटे से हारने नहीं देंगे

वैभव जब महज चार साल का था, तो वो दूध

की बोतल छोड़कर हाथ में लकड़ी का पट्टा

लेकर दिनभर गेंद के पीछे भागता था और

बेटे के इसी पागलपन को देखकर संजीव ने

बिना देर किए अपने घर के पिछवाड़े की

कच्ची मिट्टी को खोदकर एक कामचलाऊ

पिच बना दी, जहां सुबह की पहली किरण

फूटने से लेकर रात के अंधेरे तक सिर्फ एक

ही आवाज गूंजती थी - गेंद और बल्ले की

आपसी टक्कर ।

जब वैभव आठ साल का हुआ, तो उसने

जिला स्तर के ट्रायल्स में खुद से दोगुनी उम्र

के कड़क गेंदबाजों के घमंड को नेस्तनाबूद

कर दिया, जिसे देखकर संजीव समझ गए थे

कि इस बाज को उड़ाने के लिए गांव का यह

छोटा सा आसमान बहुत छोटा पड़ेगा ।

वो वैभव को लेकर समस्तीपुर से करीब सौ

किलोमीटर दूर पटना की क्रिकेट एकेडमी

की तरफ भाग पड़े, लेकिन यह सफर सिर्फ

फासले का नहीं, बल्कि आंसुओं और खून-

पसीने की एक ऐसी दास्तान थी जो आज भी

कलेजा कपा देती है। पटना में कोचिंग

दिलाने के लिए वैभव की मां रात को ग्यारह

बजे सोने के बाद भोर में ठीक दो बजे उठ

जाती थीं और सिर्फ तीन घंटे की नींद लेकर

कड़कड़ाती ठंड में भी चूल्हा जलाती थीं

ताकि बेटे के सफर के लिए खाना तैयार हो

सके, जबकि संजीव हर दूसरे दिन वैभव को

बाइक पर पीछे बैठाकर या खचाखच भरी

लोकल ट्रेनों के पायदान पर लटककर पटना

ले जाते थे ।

क्रिकेट की महंगी किट, जूते और डाइट के

खर्चे जब एक साधारण किसान की हैसियत

से बाहर होने लगे, तो संजीव के सामने एक

तरफ उनके पुरखों की जमीन थी और दूसरी

तरफ उनके बेटे की आंखों की चमक ।

रिश्तेदारों और गांव वालों ने खूब ताने दिए,

कहा कि लड़का पागल है और बाप

महापागल, एक दिन भीख मांगनी पड़ेगी,

लेकिन संजीव ने बिना झिझके अपनी

पुश्तैनी जमीन का टुकड़ा बेच दिया और सारे

पैसे बेटे के बल्ले पर लगा दिए । वैभव ने भी

अपने पिता के इस कर्ज की हर एक पाई को

रनों के बारूद में बदल दिया और महज 12

साल 284 दिन की उम्र में बिहार के लिए

मुंबई जैसी खूंखार टीम के खिलाफ रणजी

ट्रॉफी में डेब्यू करके इतिहास रच दिया, जहां

सामने खड़े बड़े-बड़े दिग्गज इस बच्चे के पैरों

की फुर्ती देखकर दंग रह गए थे ।

इसके बाद तो जैसे किस्मत ने खुद इस

लड़के के सामने घुटने टेक दिए, जब इंडिया

अंडर-19 के लिए खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के

खिलाफ वैभव ने सिर्फ 58 गेंदों में एक ऐसा

आतिशी टेस्ट शतक ठोका कि पूरी दुनिया के

क्रिकेट पंडित खड़े होकर तालियां बजाने पर

मजबूर हो गए ।

इस सनसनीखेज प्रदर्शन का असली मसाला

तब देखने को मिला जब आईपीएल 2025

के मेगा ऑक्शन से पहले राजस्थान रॉयल्स

के ट्रायल्स में पूर्व भारतीय कोच विक्रम

राठौड़ ने वैभव को परखने के लिए एक

बेहद मुश्किल सिचुएशन दी, जहां बड़े-बड़े

बल्लेबाजों के हाथ-पांव फूल जाते हैं, लेकिन

तेरह साल के इस बिहारी लड़के ने बिना

किसी खौफ के सामने वाले गेंदबाजों की

बखिया उधेड़ते हुए लगातार तीन गगनचुंबी

छक्के जड़कर पूरा ट्रायल ही लूट लिया ।

यही वजह थी कि जब दिसंबर 2024 की

उस ऐतिहासिक दोपहर को ऑक्शन की

टेबल सजी, तो महज तीस लाख की बेस

प्राइस वाले इस चौदह साल के बच्चे को

अपनी टीम में शामिल करने के लिए दिल्ली

कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के

मालिकों के बीच ऐसी रार मची कि पैसों की

बारिश होने लगी और देखते ही देखते यह

लड़का 1 करोड़ 10 लाख रुपये में बिककर

आईपीएल इतिहास का सबसे युवा

करोड़पति खिलाड़ी बन गया ।

जब टीवी पर इस बच्चे की किस्मत बदलते

देख पूरा देश झूम रहा था, तब समस्तीपुर के

एक छोटे से कमरे में संजीव सूर्यवंशी फोन

कान से लगाए फूट-फूटकर रो रहे थे, क्योंकि

वो जमीन बिकने का दर्द और दुनिया के वो

कड़वे ताने आज एक झटके में कपूर की

तरह उड़ चुके थे ।

आज जब वैभव आईपीएल के बड़े मंच पर

राजस्थान रॉयल्स की जर्सी पहनकर दुनिया

के सबसे तेज गेंदबाजों के सामने सीना

तानकर खड़ा होता है, तो स्टैंड्स में बैठा एक

बाप चुपचाप अपनी फटी हुई जेब में हाथ

डाले मुस्कुरा रहा होता है, क्योंकि उसे पता

है कि उसकी बिक चुकी जमीन पर आज

उसके बेटे ने कामयाबी का एक ऐसा महल

खड़ा कर दिया है जिसे कोई गिरा नहीं

सकता ।

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