सीमा का पति रोज शराब पीकर घर आता और उससे झगड़ा करता। कई बार वह सीमा को खाना तक नहीं देता। गर्भवती होने के बावजूद सीमा खेतों में काम करने जाती

“मां बनने का सपना”

छत्तीसगढ़ जिला बस्तर के एक छोटे से गांव के पास रहने वाली एक गरीब महिला थी — उसका नाम था सीमा। सीमा बहुत ही सीधी-सादी और मेहनती थी। उसका पति मजदूरी करता था, लेकिन शराब पीने की बुरी आदत ने घर की खुशियां धीरे-धीरे खत्म कर दी थीं। शादी के तीन साल बाद सीमा पहली बार मां बनने वाली थी। जब उसे यह खबर मिली, उसकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उसने छोटे-छोटे बच्चों के कपड़े सिलना शुरू कर दिया। हर दिन वह अपने होने वाले बच्चे के सपने देखती थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। सीमा का पति रोज शराब पीकर घर आता और उससे झगड़ा करता। कई बार वह सीमा को खाना तक नहीं देता। गर्भवती होने के बावजूद सीमा खेतों में काम करने जाती ताकि घर का खर्च चल सके। एक दिन तेज बारिश हो रही थी। सीमा पूरे दिन खेत में काम करके घर लौटी। उसे तेज दर्द हो रहा था, लेकिन घर में कोई उसकी मदद करने वाला नहीं था। उसका पति शराब के नशे में पड़ा हुआ था। रात भर दर्द से तड़पती सीमा अकेली रोती रही। पड़ोसियों ने सुबह उसकी हालत देखी और अस्पताल लेकर गए। डॉक्टरों ने बहुत कोशिश की, लेकिन सीमा का बच्चा इस दुनिया में आने से पहले ही हमेशा के लिए चला गया। जब सीमा को यह सच पता चला, वह फूट-फूट कर रोने लगी। उसने अपने बच्चे के लिए जो छोटे कपड़े बनाए थे, उन्हें सीने से लगाकर पूरी रात बिताई। उस दिन के बाद सीमा पूरी तरह टूट गई। लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने गांव की महिलाओं को पढ़ाना और उन्हें अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करना शुरू किया। वह कहती थी:

> “एक मां का दर्द वही समझ सकता है जिसने अपने बच्चे को खोया हो।”

धीरे-धीरे सीमा पूरे गांव की प्रेरणा बन गई। उसका दर्द उसकी ताकत बन गया।

सीख 📖

गर्भवती महिलाओं को प्यार, आराम और सम्मान की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

घरेलू हिंसा सिर्फ एक महिला नहीं, पूरे परिवार को तोड़ देती है। हर मां का सपना सुरक्षित और खुशहाल जीवन होना चाहिए।

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