फिल्मी दुनिया की जानी-मानी एक्ट्रेस और डिजिटल क्रिएटर संदीपा विर्क आजकल अपनी निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव को लेकर खूब सुर्खियाँ बटोर रही हैं। वजह है उनका चार महीने का तिहाड़ जेल में बिताया गया वो दौर, जिसके बारे में सुनकर किसी की भी रूह कांप जाएगी।
करोड़ों के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उलझी संदीपा को करीब छह करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़े एक केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। करीब चार महीने की कैद के बाद जब उन्हें जमानत मिली, तो बाहर आकर उन्होंने अंदर की दास्तान सुनानी शुरू की। हर किस्सा जेल सिस्टम के उस काले चेहरे को उजागर कर रहा है, जिसके बारे में आम लोग कल्पना भी नहीं कर सकते।
"हर बार सबके सामने नंगा होने का दंश"
हाल ही में एक पॉडकास्ट में बात करते हुए संदीपा ने बताया कि जेल के अंदर उनके साथ जो कुछ हुआ, वह किसी भी इंसान के साथ नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया, "जरा सोचिए, मुझे एक दिन में तीन बार सबके सामने कपड़े उतारने पड़ते थे। कोर्ट में पेशी के बाद जब बस में बैठाया जाता था, तब भी एक बार फिर से स्ट्रिप सर्च होती थी। कुल मिलाकर पिछले चार महीनों में मेरे साथ 27 बार यह अपमान दोहराया गया।"
उनकी आवाज़ में दर्द साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा कि लोग समझते हैं कि जेल जाना मतलब चार दीवारी में बंद होना, लेकिन असल यातना तो अंदर की वो प्रक्रिया है, जो आपसे आपका इंसानियत से जुड़ा हक छीन लेती है।
ब्रेस्ट चेकिंग से लेकर बदतमीजी तक – दर्दनाक सच
इससे पहले संदीपा ने ज्योत्सना बेदी के साथ बातचीत में भी जेल की इन्हीं काली सच्चाइयों को उजागर किया था। उन्होंने बताया कि जेल में एंट्री के समय महिला सुरक्षाकर्मी जिस तरह की "चेकिंग" करती हैं, वह महिला होने का एहसास तक मिटा देती है।
उन्होंने विस्तार से समझाया, "ब्रेस्ट को उठाकर जांच की जाती है कि कहीं नीचे कुछ छिपा तो नहीं है। यह सिर्फ एक बार नहीं, बार-बार होता है। और जो महिला सुरक्षाकर्मी यह करती हैं, उनका व्यवहार इतना रूखा और असंवेदनशील होता है कि आप अपने आप से शर्मिंदा हो जाते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि बड़े ब्रेस्ट साइज वाली महिलाओं के साथ और भी ज्यादा सख्ती बरती जाती है, मानो वे कोई अपराधी हों।
सिस्टम पर करारा वार
संदीपा ने इस पूरे प्रकरण को सिस्टम की बड़ी विफलता करार दिया। उनका कहना है, "हमारे समाज की सबसे दर्दनाक कमी यह है कि यहाँ आपको दोषी साबित होने से पहले ही सजा दे दी जाती है। जेल का यह तरीका किसी भी निर्दोष की रूह तोड़ने के लिए काफी है।"
उन्होंने यह भी बताया कि इन सबके बीच भी उन्होंने अपनी हिम्मत नहीं खोई। लेकिन जिन महिलाओं के पास उतना संघर्ष नहीं है, उनका क्या होता है? यह सवाल आज पूरे सिस्टम पर निशान लगा रहा है।
अब जमानत के बाद आगे क्या?
फिलहाल संदीपा विर्क जमानत पर बाहर हैं और अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई का सामना कर रही हैं। उनके आरोपों ने जेल में महिलाओं की प्रक्रियात्मक जांच (वैजाइनल और ब्रेस्ट चेकिंग) पर बहस छेड़ दी है। मानवाधिकार संगठन भी इन तरीकों पर सवाल उठा चुके हैं, लेकिन हर दिन सैकड़ों महिलाओं को इस यातना से गुजरना पड़ता है।
खबरों के अनुसार, संदीपा अब मानसिक रूप से इस आघात से उबरने की कोशिश में हैं और उन्होंने इस मामले को सार्वजनिक कर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
अस्वीकरण: यह लिखित सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध पॉडकास्ट और समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रसार है। लेखक या वेबसाइट किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में पक्ष नहीं लेते।

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