“उसकी आँखों में कुछ था... और फिर पता चला, वो मेरी नहीं थी”
अलवर – जून की एक भरी दोपहर
मैं कॉलेज के बाद पहली बार इतनी लंबी छुट्टी पर आया था।
मेरे सबसे करीबी दोस्त वरुण की शादी थी — बुलाया था कि “भाई तू नहीं आया तो शादी अधूरी लगेगी…”
मैं मंडप के पास पहुँचा तो बैंड, बाजा, और गर्म हवाओं के बीच भी माहौल बेहद रंगीन था।
“चलो यार, अब हम भी बड़े हो गए हैं…” मैंने खुद से कहा।
हल्दी, हँसी, और एक चेहरा… जो ठहर सा गया
“ये वरुण की शादी है या किसी बॉलीवुड फिल्म का सीन?”
मैंने हँसते हुए पूछा, तभी मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी।
सफेद और पीले लहंगे में, हल्दी में सजी परियों जैसी वो लड़की…
उसकी आँखों में कुछ था… एक ठहराव, एक अपनापन।
“कौन है ये?” मैंने धीरे से वरुण से पूछा।
वरुण मुस्कुराया –
“भाई, तेरे से मिलवाऊँगा… अभी छोड़, रस्म शुरू होने वाली है।”
पहली बात – पहली झलक में मोहब्बत
शाम की चाय का टाइम था। सब थक चुके थे।
मैं गार्डन में अकेला बैठा था। तभी वो आई — हाथ में ट्रे, और हल्की मुस्कान।
“चाय लेंगे?” उसने पूछा।
मैं थोड़ा सकपकाया – “हाँ… बिना चीनी की, अगर हो।”
वो हँसी – “आप भी? मुझे भी मीठी चीज़ें कम पसंद हैं…”
मुझे लगा जैसे किसी पुराने जन्म की कोई याद सामने आ गई हो।
“आपको किताबें पसंद हैं?”
वो बोली।
मैंने चौंककर देखा — “हाँ… बस ज़िंदगी में कहानियाँ थोड़ी अधूरी रह जाती हैं।”
उसने कहा —
“कुछ कहानियाँ अधूरी ही खूबसूरत होती हैं।”
और फिर… रस्मों के बीच मोहब्बत पनपने लगी
वो कभी फूलों की सजावट में उलझती,
कभी बच्चों से हँसते हुए बातें करती —
उसका हर अंदाज़ दिल को छू जाता।
मैं बस उसे देखता रहता —
बिना कुछ कहे, बस महसूस करता…
🌙 संगीत की रात – और दिल की धड़कन
उसने नीला लहंगा पहना था।
मैंने पहली बार खुद को उसकी आँखों में देख लिया।
जब सब नाच रहे थे, मैं एक कोने में खड़ा बस उसे देख रहा था।
वो पास आई –
“नाचेंगे नहीं?”
मैं बोला —
“अगर आप साथ दें… तो पूरी ज़िंदगी नाच सकता हूँ।”
वो हँसी, पर कुछ कहा नहीं।
और फिर… सच्चाई सामने आई
अगली सुबह, वरुण मेरे पास आया —
“भाई, तेरी मुलाकात मेरी साली से हो गई क्या?”
मैं चौंका —
“कौन?”
“अरे यार, सृष्टि… मेरी होने वाली बीवी की छोटी बहन।
अभी MBA कर रही है दिल्ली से। बहुत सीधी है।”
मैं जैसे पत्थर हो गया।
“मतलब… वो… वो तेरी साली है?”
“हाँ भाई, तू मिला ना उससे कल गार्डन में?”
मेरी धड़कन एक पल के लिए रुक गई…
सृष्टि…
जिसे मैं हर बीते लम्हे में महसूस करने लगा था,
जिससे बिना कहे कुछ जुड़ गया था,
वो… मेरे दोस्त की बीवी की बहन थी।
विदाई – और एक अधूरी मुस्कान
शादी का दिन आया।
मैंने खुद को छिपा लिया, दूर रखा…
सृष्टि जब विदाई के समय रो रही थी,
मेरी आँखें भी नम थीं…
पर ये आँसू सिर्फ खुशी या जुदाई के नहीं थे —
ये उस मोहब्बत के थे जो कभी कही ही नहीं गई।

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