अमेरिका के नए प्रतिबंधों से भड़का ईरान: विदेश मंत्री अराघची ने दी ट्रंप को खुली धमकी, बोले- "हमला हुआ तो अमेरिकी ठिकानों को कर देंगे राख!"


दुनिया भर की नजरें इस वक्त अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी पर टिकी हुई हैं। जहां एक तरफ 6 फरवरी को ओमान की राजधानी मस्कट में शांति वार्ता के सुर सुनाई दे रहे थे, वहीं अब स्थिति पूरी तरह पलट गई है। अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद ईरान का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ने हमला करने की गलती की, तो मध्य पूर्व (Middle East) में मौजूद उनके सैन्य ठिकाने सुरक्षित नहीं रहेंगे।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया को लग रहा था कि दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर बात बन जाएगी, लेकिन 7 फरवरी को आए नए अमेरिकी प्रतिबंधों ने आग में घी डालने का काम किया है।

शांति वार्ता के बीच तनाव का 'यू-टर्न'

खबरों के मुताबिक, 6 फरवरी को ओमान में दोनों देशों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई थी। दोनों पक्ष परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने को राजी भी थे। लेकिन ठीक अगले ही दिन, यानी 7 फरवरी को अमेरिका ने ईरान पर नए और कड़े प्रतिबंध थोप दिए। इस कदम से ईरान भड़क गया है।

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने मीडिया से बात करते हुए साफ कर दिया कि उन्हें अमेरिका के ये नए प्रतिबंध कतई मंजूर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत का अगला दौर इसी हफ्ते हो सकता है, लेकिन उससे पहले अमेरिका यह जान ले कि दबाव की राजनीति अब नहीं चलेगी।

"हमारे ऊपर हमला मतलब अमेरिकी अड्डों की तबाही"

ट्रंप प्रशासन की टेंशन बढ़ाने वाला बयान देते हुए अराघची ने कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान पर किसी भी तरह का सैन्य हमला किया, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा। जवाब में ईरान मध्य पूर्व के देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा और उन्हें तबाह कर देगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस जवाबी कार्रवाई को उन देशों (जहां अमेरिकी बेस हैं) पर हमला न माना जाए। यह हमला सिर्फ और सिर्फ अमेरिका के खिलाफ होगा, न कि उस देश की संप्रभुता के खिलाफ। यह बयान खाड़ी देशों के लिए भी एक बड़ा संकेत है।

ट्रंप की मांग: मिसाइल प्रोग्राम तुरंत बंद करो

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने मध्य पूर्व में अपनी अमेरिकी नौसेना (US Navy) की तैनाती को और बढ़ा दिया है। ट्रंप की साफ मांग है कि ईरान अपनी यूरेनियम प्रोसेसिंग को तुरंत बंद करे, क्योंकि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। साथ ही, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम भी खत्म कर दे, ताकि आतंकी संगठनों को मिल रही मदद रोकी जा सके।

अब देखना यह होगा कि इस हफ्ते होने वाली संभावित बातचीत में तनाव कम होता है या फिर दुनिया एक और बड़े युद्ध की आहट सुनेगी।


अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख समाचार एजेंसी की रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। www.sabkuchgyan.com किसी भी युद्ध या हिंसा का समर्थन नहीं करता है और केवल निष्पक्ष जानकारी पाठकों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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