रिश्ते जब खराब होते हैं तो सबसे पहले समाज कारण ढूंढता है। अगर शादी अरेंज थी तो कहा जाता है कि मां-बाप की पसंद थी, इसलिए नहीं चली। अगर लव मैरिज थी तो दावा किया जाता है कि प्यार था फिर भी रिश्ता बच नहीं पाया। भारत में शादी टूटने का मतलब सिर्फ दो लोगों का अलग होना नहीं माना जाता, बल्कि इसे पूरे परिवार की असफलता बना दिया जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि शादी चाहे अरेंज हो या लव, उसे निभाने के लिए सबसे जरूरी चीज आपसी समझ, सम्मान और संवाद होता है। शादी का तरीका नहीं, बल्कि रिश्ते को निभाने का तरीका तय करता है कि वह चलेगा या नहीं।
हाल ही में अपर्णा यादव और प्रतीक यादव का मामला सामने आया, जिसने एक बार फिर रिश्तों के सार्वजनिक तमाशे पर सवाल खड़े कर दिए। यह मामला इसलिए भी ज्यादा चर्चा में रहा क्योंकि यह मुलायम सिंह यादव के परिवार से जुड़ा है। जनवरी 2026 में प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए तलाक की बात कही। आरोप इतने निजी और तीखे थे कि देखते ही देखते यह एक पारिवारिक मुद्दा न रहकर मीडिया बहस बन गया। वहीं अपर्णा यादव ने इन आरोपों को साजिश बताया और कहा कि रिश्ते ठीक हैं, लेकिन कुछ लोग जानबूझकर विवाद पैदा कर रहे हैं।
अपर्णा और प्रतीक की शादी साल 2011 में हुई थी और यह एक लव मैरिज थी। दोनों की मुलाकात एक पारिवारिक समारोह में हुई, बातचीत बढ़ी और फिर प्यार हुआ। उस वक्त यह शादी आदर्श प्रेम विवाह मानी जाती थी। लेकिन पंद्रह साल बाद जब रिश्ते में दरार आई तो मामला आरोपों और सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंच गया। यही वह जगह है जहां सवाल उठता है कि क्या रिश्ता खत्म होने के बाद प्यार को बदनाम करना जरूरी हो जाता है।
ऐसा केवल लव मैरिज में ही नहीं होता। अरेंज मैरिज के मामले में हालात और भी ज्यादा खराब होते हैं। भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह का मामला इसका उदाहरण है। ज्योति सिंह ने मीडिया और अदालत के सामने पवन सिंह पर घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, जबरन गर्भपात और बेवफाई जैसे गंभीर आरोप लगाए। यह शादी 2018 में अरेंज मैरिज के रूप में हुई थी और ज्योति सिंह ने खुद स्वीकार किया कि इसमें उनकी मर्जी शामिल नहीं थी। यह मामला दिखाता है कि शादी चाहे परिवार की मर्जी से हो या अपनी पसंद से, अगर रिश्ता स्वस्थ नहीं है तो वह किसी भी मोड़ पर टूट सकता है।
इन दोनों मामलों में एक बात समान है। जब प्यार खत्म हुआ तो सम्मान भी खत्म कर दिया गया। जो इंसान कभी सबसे करीबी था, वही अचानक सबसे बड़ा दुश्मन बना दिया गया। रिश्ते टूटना कोई अपराध नहीं है, लेकिन रिश्ते तोड़ते वक्त एक-दूसरे को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना एक गंभीर सामाजिक समस्या है। निजी मुद्दों को सोशल मीडिया और मीडिया ट्रायल में बदल देना न सिर्फ रिश्ते को बल्कि इंसान की मानसिक स्थिति को भी नुकसान पहुंचाता है।
अगर रिश्तों से सीख लेनी हो तो आमिर खान और किरण राव का उदाहरण सबसे बेहतर है। दोनों ने साल 2021 में आपसी सहमति से अलग होने की घोषणा की और साफ कहा कि वे पति-पत्नी के रूप में साथ नहीं रह सकते, लेकिन दोस्त और परिवार बने रहेंगे। बिना आरोप, बिना कीचड़ उछाले, दोनों ने अपने रिश्ते को सम्मान के साथ समाप्त किया। आज भी वे साथ काम करते हैं और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, जो यह साबित करता है कि तलाक दुश्मनी का नाम नहीं है।
तलाक को भारत में आज भी जीवन की असफलता माना जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि यह कई बार नई शुरुआत का रास्ता बनता है। पश्चिमी देशों में लोग तलाक के बाद खुद को दोबारा खड़ा करने पर ध्यान देते हैं, नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं और बीते रिश्ते को नफरत नहीं बल्कि सीख की तरह देखते हैं। भारत में भी इस सोच की जरूरत है कि शादी तभी तक सार्थक है जब तक उसमें प्यार और सम्मान हो। जब प्यार खत्म हो जाए और रिश्ता दर्द बन जाए, तो अलग होना भी आत्मसम्मान का फैसला हो सकता है।
रिश्ते बचाना अच्छी बात है, लेकिन हर कीमत पर उन्हें ढोते रहना जरूरी नहीं। अगर अलग होना तय हो जाए, तो वह शांति और समझदारी से भी हो सकता है। बिना आरोप, बिना सोशल मीडिया पोस्ट और बिना एक-दूसरे की छवि खराब किए। प्यार खत्म हो जाए तो उसे बदनाम करना जरूरी नहीं। सम्मान के साथ अलग होना भी एक परिपक्व और इंसानी फैसला है।

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