मनोविज्ञान कहता है कि इंसान अपनी बातों से झूठ बोल सकता है, लेकिन उसका शरीर अक्सर सच उगल देता है। यहाँ कुछ ऐसे अचूक तरीके दिए गए हैं जिनसे आप जान सकते हैं कि सामने वाला आपसे कितना सच बोल रहा है।
नजरें चुराना और आँखों की असामान्य हरकतें
जब कोई व्यक्ति Signs your partner is lying के संकेतों की बात करता है, तो 'आई कॉन्टैक्ट' सबसे प्रमुख होता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो लोग झूठ का सहारा लेते हैं, वे सामने वाले से नजरें मिलाकर बात करने में असहज महसूस करते हैं।
यदि आपका पार्टनर बात करते समय बार-बार नजरें नीचे कर रहा है, इधर-उधर देख रहा है या सामान्य से अधिक बार अपनी पलकें झपका रहा है, तो यह एक बड़ा इशारा है। यह Body language of a liar का हिस्सा है, क्योंकि झूठ बोलते समय मस्तिष्क पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति सीधा संपर्क बनाने से डरता है।
सवालों का सीधा जवाब न देकर बात घुमाना
झूठ बोलने वाला व्यक्ति कभी भी आपके सवाल का सीधा और संक्षिप्त जवाब नहीं देता। वे अक्सर Psychology of lying in relationships के तहत रक्षात्मक रवैया अपनाते हैं।
अगर आप उनसे कोई सीधा सवाल पूछते हैं और वे उसका जवाब देने के बजाय आपको एक लंबी-चौड़ी और उलझी हुई कहानी सुनाने लगें, तो समझ जाइये कि वे तथ्यों को गढ़ रहे हैं। झूठ को सच दिखाने के लिए अक्सर लोग बहुत ज्यादा विवरण (Details) देने लगते हैं, ताकि आप उन पर शक न करें। इसके अलावा, सवाल के बदले सवाल पूछना भी सच छिपाने का एक तरीका है।
फोन को लेकर अचानक बढ़ी प्राइवेसी और बेचैनी
आज के डिजिटल युग में Partner cheating signs की शुरुआत अक्सर स्मार्टफोन के व्यवहार में आए बदलावों से होती है। प्राइवेसी हर किसी का हक है, लेकिन यदि यह प्राइवेसी अचानक 'सीक्रेसी' में बदल जाए, तो सतर्क होने की जरूरत है।
यदि आपका पार्टनर अपना फोन आपके हाथ में आने पर अचानक बेचैन हो जाए, घबराने लगे या फोन पर अचानक से कई प्राइवेसी कोड लगा दे, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि वे आपसे कुछ छिपा रहे हैं। पहले के सहज व्यवहार और अब के 'फोन-प्रोटेक्टिव' व्यवहार के बीच का अंतर अक्सर झूठ की ओर इशारा करता है।
व्यवहार में विरोधाभास और चिड़चिड़ापन
सच्चाई हमेशा स्थिर रहती है, जबकि झूठ समय के साथ बदल जाता है। अगर आप अपने पार्टनर से एक ही घटना के बारे में कुछ दिनों बाद दोबारा पूछें और उनके जवाब में अंतर मिले, तो यह झूठ की स्पष्ट निशानी है।
अक्सर जब कोई झूठ पकड़े जाने के डर में होता है, तो वह बिना बात के चिड़चिड़ाने लगता है। वे आप पर ही 'शक करने' का आरोप लगाकर खुद को बचाने की कोशिश कर सकते हैं। यह व्यवहार अक्सर तब देखा जाता है जब व्यक्ति के पास अपने झूठ को छिपाने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं बचता।
विशेष सुझाव: किसी भी रिश्ते में शक करना समाधान नहीं है। यदि आपको ऊपर दिए गए संकेत महसूस होते हैं, तो बेहतर है कि अपने पार्टनर से शांतिपूर्वक बैठकर बात करें। कई बार गलतफहमियां भी रिश्तों में दरार ला देती हैं, इसलिए किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले स्थिति को अच्छी तरह समझ लें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सामान्य व्यवहार संबंधी शोध और मनोवैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। हर व्यक्ति का स्वभाव और स्थितियां अलग हो सकती हैं। www.sabkuchgyan.com किसी भी व्यक्तिगत रिश्ते के विवाद या निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं है।

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