यूपी पुलिस की बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट का कोड़ा: दाढ़ी नोचने और बेरहमी से पीटने पर लगाई जबरदस्त क्लास


नई दिल्ली:
उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। एक व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई करने और उसकी दाढ़ी नोचने (खींचने) के आरोप में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने यूपी पुलिस को जमकर फटकार लगाई है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए हैरानी जताई कि आखिर पुलिस अपने ही विभाग के दोषी अधिकारियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला उत्तर प्रदेश का है, जहां एक व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया था कि उसे अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस थाने के अंदर उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। पुलिसकर्मियों ने न केवल उसे बुरी तरह पीटा, बल्कि उसकी दाढ़ी भी नोची, जो उसकी धार्मिक आस्था और मानवीय गरिमा पर सीधा प्रहार था।

इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद, स्थानीय पुलिस ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने में आनाकानी की और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। इसके बाद पीड़ित ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां:

जस्टिस ने मामले की सुनवाई करते हुए यूपी पुलिस के रवैये पर तीखे सवाल उठाए:

  1. लापरवाही पर सवाल: कोर्ट ने पूछा कि जब आरोप इतने गंभीर हैं, तो पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की? क्या वर्दी पहनने का मतलब यह है कि आप कानून से ऊपर हो गए हैं?

  2. मानवाधिकार का हनन: दाढ़ी खींचने की घटना को कोर्ट ने बेहद अपमानजनक और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। कोर्ट ने कहा कि किसी नागरिक की गरिमा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  3. जांच पर संदेह: सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि पुलिस विभाग अपने ही दागी अफसरों को बचाने के लिए जांच में देरी कर रहा है।

कोर्ट ने दिया यह आदेश

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं:

  • तत्काल कार्रवाई: आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

  • स्टेटस रिपोर्ट: कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक इस मामले में क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए।

  • दोषियों पर गाज: कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की, तो मामले को किसी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे CBI) को सौंपा जा सकता है।

योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर अपराध और पुलिस की मनमानी पर 'जीरो टॉलरेंस' की बात करते हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की यह फटकार बताती है कि निचले स्तर पर पुलिस प्रशासन में अभी भी सुधार की गुंजाइश है। कोर्ट की इस सख्ती के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि पीड़ित को न्याय मिलेगा और दोषी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी।

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन सभी पुलिस अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है जो वर्दी की आड़ में आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि 'कानून का राज' पुलिस की लाठी से नहीं, बल्कि संविधान से चलता है।

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