पानी की कमी (डिहाइड्रेशन): रातभर सोने के दौरान शरीर में पानी कम हो जाता है। अगर दिनभर भी पर्याप्त पानी नहीं पिया गया तो सुबह ब्लड प्रेशर गिर सकता है।
लो ब्लड शुगर: डायबिटीज़ के मरीजों या लंबे समय तक खाली पेट रहने वालों में ब्लड शुगर गिरने से चक्कर आ सकते हैं।
दवाइयों का असर: ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, दिल की बीमारी या नींद की दवाइयाँ ब्लड प्रेशर और नसों के कामकाज को प्रभावित कर सकती हैं।
स्लीप एपनिया: रात में सांस रुक-रुक कर चलने से ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है, जिससे सुबह भारीपन या चक्कर महसूस हो सकता है।
कान की समस्या: कान का अंदरूनी हिस्सा शरीर का संतुलन बनाए रखता है। इसमें सूजन, संक्रमण या क्रिस्टल की गड़बड़ी होने पर उठते ही तेज चक्कर आ सकते हैं।
अन्य कारण: खून की कमी (एनीमिया), माइग्रेन या न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
बचाव के आसान तरीके
बिस्तर से अचानक न उठें, पहले कुछ मिनट बैठें और फिर धीरे-धीरे खड़े हों।
दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और सुबह उठते ही एक गिलास पानी लें।
रात में शराब और ज्यादा कैफीन से बचें।
सुबह का नाश्ता जरूर करें ताकि ब्लड शुगर स्थिर रहे।
अगर कोई दवा लेने के बाद चक्कर बढ़ रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लें।
👉 महत्वपूर्ण: कभी-कभी चक्कर आना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है तो यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

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