अगर आपका ब्लड शुगर सामान्य है, डायबिटीज की कोई शिकायत नहीं है, लेकिन इसके बावजूद हाथ-पैरों में दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होता है, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसी स्थिति में नसों से जुड़ी एक समस्या जिम्मेदार हो सकती है, जिसे पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है।
अक्सर यह माना जाता है कि नसों में दर्द केवल डायबिटीज के मरीजों को होता है, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह समस्या उन लोगों में भी देखी जा रही है, जिन्हें कभी डायबिटीज नहीं रही।
क्या है पेरिफेरल न्यूरोपैथी?
मैक्स साकेत के न्यूरोसर्जरी विभाग में एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. दलजीत सिंह के मुताबिक, पेरिफेरल न्यूरोपैथी में दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड से निकलने वाली नसों को नुकसान पहुंचता है। जब ये नसें ठीक से काम नहीं कर पातीं, तो हाथों और पैरों में झनझनाहट, जलन, दर्द या सुन्नपन जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
यह परेशानी सिर्फ डायबिटीज के मरीजों तक सीमित नहीं है। कई बार शुगर पूरी तरह कंट्रोल में होने या डायबिटीज न होने के बावजूद भी नसों से जुड़े लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
पेरिफेरल न्यूरोपैथी के मुख्य कारण
डॉक्टरों के अनुसार, इस समस्या का सबसे आम कारण शरीर में विटामिन B12 की कमी है। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियां, लंबे समय तक गलत पोश्चर में बैठना, गर्दन या कमर की नसों पर दबाव और कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां भी नसों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
आजकल यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखने को मिल रही है, जो लंबे समय तक डेस्क जॉब करते हैं, शारीरिक गतिविधि कम होती है और नियमित एक्सरसाइज नहीं करते।
कम उम्र में क्यों बढ़ रही है यह परेशानी?
डॉ. दलजीत सिंह बताते हैं कि पहले पेरिफेरल न्यूरोपैथी के मामले 50 या 60 साल की उम्र के बाद सामने आते थे, लेकिन अब 30 और 40 साल के लोगों में भी यह समस्या बढ़ रही है।
यह बीमारी अचानक नहीं होती। शरीर पहले से कुछ संकेत देने लगता है, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, खासकर वे लोग जिन्हें डायबिटीज नहीं है और जो खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हैं।
नसों में खराबी के शुरुआती लक्षण
अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ सकती है। इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं।
हाथों और पैरों में सुन्नपन महसूस होना।
पैरों के तलवों में जलन या चुभन जैसा अहसास।
चलते समय संतुलन बिगड़ना।
हाथों में कमजोरी या चीजें पकड़ने में परेशानी।
इन लक्षणों को लंबे समय तक अनदेखा करना नुकसानदायक हो सकता है।
इलाज कैसे किया जाता है?
इलाज की शुरुआत सबसे पहले कारण पता लगाने से होती है। अगर विटामिन की कमी पाई जाती है, तो उसके लिए सप्लीमेंट और दवाएं दी जाती हैं।
अगर समस्या रीढ़ या नसों पर दबाव से जुड़ी हो, तो फिजियोथेरेपी, सही एक्सरसाइज और जरूरी दवाओं की मदद ली जाती है।
दर्द को कंट्रोल करने के लिए न्यूरोपैथिक पेन की विशेष दवाएं भी दी जाती हैं, ताकि मरीज को राहत मिल सके।
निष्कर्ष
अगर डायबिटीज नहीं होने के बावजूद नसों में दर्द, झनझनाहट या सुन्नपन बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही इलाज से इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य मेडिकल जानकारी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। किसी भी लक्षण या समस्या के लिए स्वयं इलाज न करें। सही जांच और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।

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