शराब पीने से पहले जमीन पर क्यों छिड़कते हैं कुछ बूंदें? 99% लोग नहीं जानते इसके पीछे की ये 3 दिलचस्प वजहें!

 


महफिल जमी हो, जाम हाथ में हो, तो आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ लोग पीने से पहले शराब की कुछ बूंदें जमीन पर टपकाते हैं या उंगली से छिड़कते हैं। इसे देखकर कई लोग इसे महज एक 'अंधविश्वास' या 'पुरानी आदत' मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है?

अगर आप सोचते हैं कि इसका कोई जवाब नहीं है, तो आप गलत हैं। इसके पीछे प्राचीन इतिहास, पूर्वजों के प्रति सम्मान और एक गहरा मनोविज्ञान छिपा है। आइए जानते हैं वो जवाब जो शायद आपके 'पीने वाले' दोस्तों को भी नहीं पता होंगे।


1. 'तर्पण' और पूर्वजों को याद करना (Libation) 

दुनिया भर की कई संस्कृतियों में, विशेष रूप से भारत में, यह माना जाता है कि हमारे पूर्वज (पितृ) हमेशा हमारे आस-पास अदृश्य रूप में मौजूद होते हैं।

  • मान्यता: शराब को एक उत्सव की वस्तु माना जाता है। इसलिए, उत्सव शुरू करने से पहले पहली बूंद जमीन पर गिराकर अपने उन पूर्वजों को याद किया जाता है जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।

  • सम्मान: इसे एक प्रकार का 'तर्पण' माना जाता है, ताकि पितृ तृप्त रहें और उनका आशीर्वाद बना रहे।

2. 'धरती माँ' को भेंट (Offering to Mother Earth) 

भारतीय ग्रामीण अंचलों और जनजातीय समुदायों में यह परंपरा बहुत पुरानी है।

  • वजह: लोग मानते हैं कि धरती माँ हमें सब कुछ देती है, यहाँ तक कि वह अनाज भी जिससे यह मदिरा बनी है। इसलिए, पहली बूंद धरती माँ को समर्पित की जाती है ताकि धरती की उर्वरता बनी रहे और प्रकृति का संतुलन न बिगड़े। इसे 'अर्घ्य' देने जैसा ही सम्मान माना जाता है।

3. बुरी शक्तियों और 'नजर' से बचाव 

पुराने समय में एक और दिलचस्प मान्यता प्रचलित थी।

  • अंधविश्वास या तर्क: ऐसा माना जाता था कि अगर आप अकेले या महफिल में कुछ पी रहे हैं, तो अदृश्य बुरी शक्तियां या 'नजर' आपकी खुशी में बाधा डाल सकती हैं।

  • उपाय: जमीन पर कुछ बूंदें छिड़ककर उन शक्तियों को शांत किया जाता था ताकि पीने वाले को कोई नुकसान न हो और शाम बिना किसी झगड़े या अनहोनी के बीत जाए।


क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी है? 🔬

हालाँकि इसका कोई कड़ा वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन इतिहासकार बताते हैं कि पुराने जमाने में शराब बनाने के तरीके आज जैसे रिफाइंड नहीं थे।

"प्राचीन काल में जब शराब मटकों या खुले बर्तनों में रखी जाती थी, तो ऊपरी परत पर कुछ अशुद्धियाँ (Impurities) या धूल जमा हो सकती थी। लोग पहली कुछ बूंदें फेंक देते थे ताकि अशुद्ध हिस्सा निकल जाए।" धीरे-धीरे यही प्रक्रिया एक 'रिवाज' बन गई।


दुनिया भर में अलग-अलग नाम 

इसे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी किया जाता है:

  • यूनान (Greece) और रोम: यहाँ इसे 'Libation' कहा जाता था, जहाँ देवताओं को खुश करने के लिए शराब की बूंदें फर्श पर गिराई जाती थीं।

  • रूस और पूर्वी यूरोप: यहाँ भी इसे पूर्वजों के सम्मान का हिस्सा माना जाता है।


निष्कर्ष: अगली बार जब आप किसी को ऐसा करते देखें, तो समझ जाइएगा कि यह केवल एक आदत नहीं, बल्कि हज़ारों साल पुरानी परंपरा की एक झलक है। चाहे वो देवताओं के प्रति सम्मान हो या पूर्वजों की याद—शराब की वो कुछ बूंदें बहुत कुछ कहती हैं!

चेतावनी (Statutory Warning): शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। यह लेख केवल सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। www.sabkuchgyan.com शराब के सेवन को बढ़ावा नहीं देता है।

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