उत्तराखंड के एक 22 साल के युवक को अपनी मां और बहन की तरफ से जीवनदान मिला है. दरअसल ये युवक सात साल की उम्र से ही एक "दुर्लभ आनुवंशिक स्थिति" से पीड़ित है. कई दिनों से इसका इलाज चल रहा है, लेकिन इस बार किडनी फेल होने के कारण समस्या ज्यादा बढ़ गई थी. इस युवक को हाल ही में एक निजी अस्पताल में शिफ्ट किया गया था, जहां पर उसकी 27 वर्षीय बहन ने लीवर और 46 वर्षीय मां ने किडनी दान की है.
इस बीमारी से पीड़ित था युवक
डॉक्टरों ने कहना है कि ये युवक प्राइमरी हाइपरॉक्सिल्यूरिया टाइप 1 (Primary Hyperoxyluria Type 1) नाम की एक बीमारी से पीड़ित है. ये एक तरह की जीन की बीमारी है, जिसमें एजीएक्सटी जीन में म्यूटेशन होता है. जिससे लीवर की एंजाइम उत्पन्न करने की क्षमता कम हो जाती है, जो शरीर में ऑक्सालेट स्तर को बनाए रखने में मदद करता है. उन्होंने कहा कि इस जीन में अनुपस्थिति या दोष ऑक्सालेट को मेटाबॉलिज्म को रोकता है. इससे किडनी (गुर्दे की पथरी) और अन्य अंगों जैसे हृदय, हड्डियों, रक्त वाहिकाओं आदि में अघुलनशील कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल जमा हो जाता है, जिससे अंग खराब हो जाते हैं."
मां ने किडनी तो बहन ने दिया लीवर
दरअसल ये युवक उत्तराखंड का रहने वाला है, और शुरुआत में वहीं पर इलाज करवा रहा था. लेकिन हाल में जब उसकी स्थिति खराब हुई तो नियमित हेमोडायलिसिस शुरू हो गया. इस बार हालात इतनी गंभीर हो गई थी, जिसके बाद उन्हें छह जून को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार, नेफ्रोलॉजी और मल्टी-ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट, डॉ कैलाश नाथ सिंह ने उन्हें तुरंत किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी कराने की सलाह दी. संदीप गुलेरिया, सीनियर कंसल्टेंट सर्जन इन जनरल सर्जरी, जीआई सर्जरी एंड ट्रांसप्लांटेशन, और डॉ नीरव गोयल, सीनियर कंसल्टेंट, लिवर ट्रांसप्लांट की देखरेख में, अस्पताल में 7 जून को 16 घंटे लंबी किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई.
फिलहाल ठीक है मरीज
गुर्दे में बार-बार पथरी होने से गुर्दा खराब हो सकता है, और अगर इसका इलाज समय पर ना लिया जाए तो ये जीवन के लिए खतरा बन सकता है. इसीलिए डॉक्टरों ने तुरंत इस युवक को किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी कराने की सलाह दी. फिलहाल सर्जरी के बाद मरीज को 21 दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया गया, और अब वो डॉक्टर से फॉलो-अप के लिए अस्पताल आता है
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