जिला अस्पताल में रविवार को अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही उजागर हुई। अस्पताल की लिफ्ट में करीब 20 मिनट तक मरीज फंसे रहे। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों की जान पर बन आई। 10 फीट ऊपर से महिलाओं को निकाला गया, तब जाकर जान बची। कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। सीएमएचओ ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए सिविल सर्जन को जवाबदेही के लिए जिम्मेदार बताया।
बता दें कि जिला अस्पताल में बी, सी, डी वार्ड और ऑपरेशन थिएटर में जाने के लिए भूतल से लिफ्ट का प्रयोग करना होता है। इसी लिफ्ट से स्ट्रेचर पर मरीजों को भी वार्डों में शिफ्ट व ऑपरेशन के लिए लाया और ले जाया जाता है। रविवार दोपहर करीब 3 बजे लिफ्ट से मरीज को वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा था। इसी बीच लिफ्ट खराब होकर रास्ते में ही बंद गई। मरीज और उनके तीमारदार पहले तो कुछ समझ नहीं पाए, लेकिन जब कुछ देर तक लिफ्ट चालू नहीं हुई, तो शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर अस्पताल स्टाफ आया, लेकिन बेबस रहा। आखिर में लिफ्ट के 10 फीट ऊपर लगी लोहे की चादर काटी गई। यहां से महिलाओं को निकाला गया।
दोषियों पर करेंगे कार्रवाई
मामले को कलेक्टर आशीष सिंह ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि लिफ्ट के संचालन और मेंटेनेंस के लिए जवाबदेही तय की जाएगी, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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