जल्द शादी करने की वजह बताई; आगे का पूरा प्लान भी बताया पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने

 


पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री। उम्र 26 साल। लोग इन्हें ‘बागेश्वर सरकार’ के नाम से भी जानते हैं। बागेश्वर धाम में लगने वाले दरबार के कारण सोशल मीडिया पर इनके लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन लोगों को इनकी सलाह है कि सोशल मीडिया के चक्कर में मत पड़िए। एक प्रवचन के दौरान कह चुके हैं कि शादी करेंगे। इसके पीछे इनका अपना तर्क है।

पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दैनिक भास्कर के साथ खास इंटरव्यू के पहले पार्ट में विवादों और आरोपों पर खुलकर बात की थी। आज इंटरव्यू के दूसरे पार्ट में निजी जिंदगी से लेकर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर बात। काले-लाल कपड़ों में अर्जी लगवाने से लेकर राजनीति में आने की संभावना पर चर्चा। जवाब, कभी चुटकी बजाते हुए तो कभी हंसकर। पहली बार अपनी शादी के बारे में खुलकर बात की। उनसे हुई खास बातचीत के खास अंश…

सवाल : धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से 'बागेश्वर सरकार' बनने के इस सफर को आप कैसे देखते हैं?

यह परंपरानुगत प्राप्त मार्ग है। हमारे पूज्य दादा गुरु भी इस मार्ग पर थे। हम आज भी शास्त्री हैं। सरकार बागेश्वर बालाजी को कहा जाता है। न तो हम अपने आप को सरकार मानते हैं न हम सरकार हैं। सरकार तो एक ही हैं वह बागेश्वर बालाजी की सरकार। इसमें रहस्य सिर्फ गुरुकृपा है। गुरु बलवान तो चेला पहलवान होता है। उम्र मायने नहीं रखती है, संकल्प मायने रखते हैं और संकल्पों की कद्र होती है। अगर सनातन का जुनून होगा तो अवस्था कुछ भी हो व्यक्ति अनेक लोगों को एक साथ जोड़कर राम से जुड़ सकता है, क्योंकि राम का नाम जोड़ने का ही कार्य करता है।

 दरबार तो 11-12 साल से लग रहा है। कोरोना से दरबार का कोई लेना-देना नहीं है। पूर्व में भी दरबार लगता था। हां, यह कह सकते हैं कि सोशल मीडिया में लोगों ने अपलोडिंग की, जिससे माउथ पब्लिसिटी हुई। पिछले चार-पांच साल में यह ज्यादा हुआ। आपकी नजर अब पहुंची है।

देखिए किसी भी विषय में सोशल मीडिया का नेगेटिव और पॉजिटिव दोनों पक्ष है, लेकिन सोशल मीडिया संपूर्ण नहीं है। कोई व्यक्ति एक बार आएगा, यदि उसे सत्यता नहीं मिलेगी तो वह दोबारा नहीं आएगा। सोशल मीडिया माध्यम और साधन हो सकता है, साध्य नहीं। सोशल मीडिया को हम साधन तो मानते हैं साध्य नहीं। साध्य तो बालाजी को ही मानते हैं। उन्हें जिनको यहां बुलाना होता है, उन्हें वे किसी न किसी माध्यम से खबर भेज देते हैं। बालाजी का, राम नाम का, अपने गुरु का। गुरु हमारे दादा गुरुजी हैं। उन्होंने हमें इस धाम से जोड़ा। हमारी जिंदगी का एक-एक हिस्सा हमारे गुरु के नाम है, और जिसका गुरु बलवान होता है, चेला पहलवान होता है। गुरु को मानने वाला बुद्धू नहीं बुद्ध होता है।

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