साल 2022 की आखिरी अमावस्या पर वृद्धि योग का संयोग बन रहा है। पौष माह की अमावस्या तिथि 23 दिसंबर को पड़ रही है। जिस तरह आश्विन माह की अमावस्या तिथि को सर्व पितृ अमावस्या के रूप में मनाया जाता है और सभी पितरों के निमित्त अर्पण, तर्पण किया जाता है।
इसी तरह पौष माह के कृष्ण पक्ष को लघु पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है। पौष अमावस्या पर श्राद्ध कर्म, तर्पण और स्नान-दान करना शुभ माना जाता है। पितृ दोष हो तो पवित्र नदी में स्नान करने और पिंडदान, तर्पण की मान्यता है।
23 दिसंबर को अमावस्या-पितरों के निमित्त जल का तर्पण करें
रविशंकर विश्वविद्यालय के पीछे स्थित बंजारी मंदिर के पुजारी पं. राजेश शुक्ला के अनुसार हिंदू संवत्सर के 10वें महीने को पौष माह कहा जाता है। इस माह को लघु पितृ पक्ष भी कहा जाता है। आश्विन माह की सर्व पितृ अमावस्या की तरह ही पौष माह की अमावस्या तिथि पर पूर्वजों को अर्पण, तर्पण करना चाहिए।
इससे पूर्वज प्रसन्न होकर सुख, समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। पवित्र नदियों में स्नान से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होने की मान्यता है।
Post a Comment