हृदय दो भागों में विभाजित होता है, दायां एवं बायां. हृदय के दाहिने एवं बाएं ओर दो-दो चैम्बर होते हैं, जिन्हें एट्रिअम एवं वेंट्रिकल कहते है. इस तरह कुल मिलाकर हृदय में चार चैम्बर होते हैं. दाहिना भाग शरीर के सभी भागों से दूषित रक्त जमा करता है और उसे फेफडों में भेजता है. रक्त फेफडों में से शुद्ध होकर हृदय के बाएं भाग में वापस लौटता है, जहां से वह शरीर में वापस सभी जगहों पर पहुचाया जाता है. चार वॉल्व, दो बाईं ओर (मिट्रल एवं एओर्टिक) एवं दो हृदय की दाईं ओर (पल्मोनरी एवं ट्राइक्यूस्पिड) रक्त के बहाव को नियंत्रित करने का कार्य करते हैं.
हार्ट की बीमारी कैसे होती है?
हृदय के अच्छे हेल्थ के लिए उसे ऑक्सीजन और नुट्रीएंट्स की आवश्यकता होती है. हृदय को पोषण एवं ऑक्सीजन, रक्त के द्वारा मिलता है जो कोरोनरी धमनियों द्वारा प्रदान किया जाता है. अचानक धमनियों में रुकावट उत्पन्न होती है और हृदय की मांशपेशियों में रक्त का प्रवाह रूक जाता है. परिणामतः व्यक्ति को हार्ट अटैक या दिल का दौरा पड़ता है.
हार्ट अटैक के लक्षण
- सीने में तकलीफ, दर्द या जलन होना
- सीने में बेचैनी महसूस होना
- मतली, हार्टबर्न और पेट में दर्द
- हाथ, कमर, पीठ या जॉइंट्स में दर्द
- साँस लेने में दिक्कत
- सामान्य से अधिक पसीना आना
- पैरों में सूजन
- चक्कर आना या सिर घूमना
- थकान
- जी मिचलाना
हार्ट अटैक के प्रकार
हार्ट अटैक मुख्यतः चार प्रकार के होते है.
1. कोरोनरी धमनी रोग
दिल की बिमारियों में, यह बेहद आम बीमारी है. यह बीमारी दिल के पास की नसों में फैट जमा होने से होता है. फैट जमा होने से, नसों में रक्त का प्रवाह बाधित होता है, जिसके परिणामस्वरुप हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी समस्याएँ पैदा होती है.
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