जन्मदिन के मौके पर आज उनकी जिंदगी के अहम किस्सों को हम लेकर आए हैं।
शुरुआत बचपन से कर रहे हैं…
1 जुलाई 1973 को अखिलेश जब का सैफई में जन्म हुआ तो मुलायम सिंह यादव के खास दोस्त प्रधान दर्शन सिंह यादव ने उनका नाम टीपू रख दिया। गांव वालों को यह नाम समझ नहीं आया फिर जब दर्शन ने उन्हें टीपू सुल्तान के बारे में बताया तब सब समझ गए। अखिलेश 5 साल के हुए तो उनके चाचा प्रो. रामगोपाल यादव उनका एडमिशन करवाने सेंट मैरी स्कूल ले गए।
स्कूल में शिक्षक ओम प्रकाश रघुवंशी फॉर्म भरवाने लगे तो पूछा नाम क्या है, रामगोपाल ने कहा, "टीपू लिखिए।" स्कूल का स्टॉफ हैरान होकर टीपू और रामगोपाल को देखने लगा। तब मुलायम सिंह से फोन पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, "टीपू से ही पूछ लीजिए।" टीपू को नामों के चार ऑप्शन दिए गए। टीपू ने अखिलेश नाम को चुना और फॉर्म में वही नाम दर्ज करवाया। इस दिन से टीपू अखिलेश बन गए। यह बात रामगोपाल ने अपनी किताब 'राजनीति के उस पार' में लिखी है।
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पहले सेमेस्टर में सिर्फ दो विषय में पास हुए अखिलेश
पत्रकार सुनीता एरन ने अखिलेश की जिंदगी पर "अखिलेश यादव- बदलाव की लहर" नाम से किताब लिखी है। इसमें उन्होंने लिखा, "अखिलेश 10 साल के हुए तो सुरक्षा कारणों के चलते उनका एडमिशन राजस्थान मिलिट्री स्कूल, धौलपुर में करवा दिया गया। यहां से स्कूलिंग पूरी हुई। एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग के लिए मैसूर का जेएसएस कॉलेज चुना। यहां पहले सेमेस्टर में वह सिर्फ दो विषयों में पास हो पाए।" अखिलेश ने बाद में कहा था कि जितनी बैक मेरी लगी शायद ही किसी बच्चे की लगी हो।"
दूसरी तरफ, डिंपल यादव ने कभी पुणे में तो कभी बठिंडा के आर्मी स्कूल में पढ़ाई की। एक बार तो उन्होंने अंडमान निकोबार द्वीप में रहकर पढ़ाई की। ऐसा इसलिए, क्योंकि पिता कर्नल आरएस रावत का ट्रांसफर जहां भी होता बेटी उनके साथ वहीं चली जाती। साल 1995 में उन्होंने लखनऊ के आर्मी स्कूल से इंटर पास कर लिया। इसी दौरान एक दोस्त के घर अखिलेश और डिंपल पहली बार एक-दूसरे से मिले।
पहली नजर में दिल दे बैठे थे अखिलेश
अखिलेश ने जब पहली बार डिंपल को देखा तभी उन्हें वह पसंद आ गईं। डिंपल की उम्र उस वक्त महज 17 साल थी। दोनों में थोड़ी देर बात भी हुई। यह बातचीत पढ़ाई और परिवार को लेकर थी। इस मुलाकात के बाद डिंपल लखनऊ यूनिवर्सिटी में कॉमर्स की पढ़ाई करने चली गईं। अखिलेश एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया के सिडनी यूनिवर्सिटी पहुंचे।
अखिलेश की ऑस्ट्रेलिया की पढ़ाई में अमर सिंह की विशेष भूमिका थी।
सिडनी के बाजार में बर्तन खरीदने गए थे अमर सिंह
1996 में अखिलेश को अमर सिंह अपने साथ लेकर सिडनी यूनिवर्सिटी पहुंचे थे। सिडनी के बाजार में गए। अखिलेश के लिए जो भी जरूरी सामान था उसे उन्होंने खरीदा। इसका जिक्र उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक न्यूज चैनल पर किया था। अमर सिंह ने कहा था कि अखिलेश को किसी चीज की जरूरत होती तो मुलायम सिंह से पहले वह हमें बताते थे। ऐसा इसलिए क्योंकि वह मुलायम सिंह से डरते थे।

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