नई दिल्ली: महाशिवरात्रि को लेकर कहा जाता है कि इस दिन देवों के देव महादेव की पूजा-अर्चना करने से आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. भगवान शंकर अपने भक्तों से बड़ी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं. इसलिए महाशिवरात्रि पर भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं.
महाशिवरात्रि में 59 साल बाद शश योग बन रहा है. इस दिन शनि और चंद्र मकर राशि में होंगे, गुरु धन राशि में, बुध कुंभ राशि में तथा शुक्र मीन राशि में रहेंगे. साथ ही शुभ कार्यों को संपन्न करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन बन रहा है. साधना सिद्धि के लिए भी ये योग खास माना जाता है.
महाशिवरात्रि की संपूर्ण पूजा विधि भगवान शिव की अराधना सच्चे दिल से करिए. शिव आप पर जरूर प्रसन्न होंगे. शिव रात्रि को भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करा कराएं. केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं. पूरी रात्रि का दीपक जलाएं. चंदन का तिलक लगाएं. तीन बेलपत्र, भांग धतूर, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं. सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें. पूजा में सभी उपचार चढ़ाते हुए ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें.
महाशिवरात्रि की तिथि और शुभ मुहूर्त महाशिवरात्रि की तिथि:
चार पहर की पूजा :
महाशिवरात्रि की पूजा रात में एक या चार बार अलग अलग प्रकार से की जाती है. चार बार शिव पूजा करने के लिए चार प्रहर (प्रहर) प्राप्त करने के लिए पूरी रात की अवधि को चार में विभाजित किया जा सकता है. इस दिन हर एक प्रहर की अलग अलग पूजा विधि होती है. हालांकि इस दिन रुद्राभिषेक का खास महत्व बताया जाता है. जानिए चार प्रहर की पूजा का समय
1. रात्रि प्रहर पूजा : शाम 06:21 से रात्रि 09:27 बजे तक
2. रात्रि प्रहर पूजा : रात्रि 09:27 से रात्रि 12:33 (02 मार्च)
3. रात्रि प्रहर पूजा : रात्रि 12:33 से सुबह 03:39 बजे तक (02 मार्च)
4. रात्रि प्रहर पूजा : सुबह 03:39 बजे से 06:45 बजे तक (02 मार्च)
वहीं,निशिता काल पूजा का समय (Nishita Kaal Puja Time) 02 मार्च 2022 को सुबह 12:08 से लेकर सुबह 12:58 बजे तक ही रहने वाला है.चतुर्दशी तिथि कब शुरू होगी : 01 मार्च 2022 को सुबह 03:16 बजे से होगी प्रारंभ
चतुर्दशी तिथि कब समाप्त होगी : 02 मार्च 2022 को सुबह 01:00 बजे होगा समापन
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