लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) भारत की उन नामचीन हस्तियों में से हैं जिन्होंने अपने हुनर से पूरी दुनिया को अपना दीवाना बनाया ही साथ ही साथ उनके जीवन यात्रा ने सभी को चौकाया भी. लता की गायकी (Lata Mangeshkar Songs) को एक चमत्कार की तरह देखा जाता रहा है. उनकी गायकी में वो आकर्षण था जो सदियों में एक बार ही किसी को प्राप्त होता है. इसी हुनर ने लता को सबसे अलग और सबसे खास बनाया. उनके जीवन से जुड़ी कई ऐसी कहानियां है जिसे कभी ना जाना गया ना ही सुना गया. आज लता मंगेशकर से जुड़े उन किस्सों (Lata Mangeshkar Stories) को आपके बीच लेकर आएं हैं जो अनकहे और अनसुने हैं.
1. पिता के निधन के बाद उठाई परिवार की जिम्मेदारी
लता मंगेशकर का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था उनका बचपन अभावों में गुजरा. उनके सर से मात्र 13 साल की उम्र में पिता का साया उठ गया था. ये वो समय था जब लता के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी. जिसके बाद उन्होंने अपनी विधवा मां के साथ 3 बहनें और भाइयों के लिए काम की शुरुआत की. उन्होंने गायकी को ही अपने जीवान-यापन का जरिया बनाया.
2. पहला गाना मराठी फिल्म के लिए गाया
लता ने मात्र 5 साल की उम्र से गायकी शुरू कर दी थी लेकिन घर पर कम उम्र में ही जिम्मेदारियों का बोझ पड़ने पर उन्होंने इसे प्रोफेशन बना लिया. उन्होंने गायकी की शुरुआत मराठी फिल्म में गाना गाकर किया था. उनका पहला गाना मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ का ‘नाचू या गड़े’ था इस गाने को संगीत दिया था सदाशिवराव ने दिया था. उनका पहला गाना ही फिल्म में नहीं चुना गया लेकिन इसके बाद भी उन्होंने मराठी फिल्मों में गाना जारी रखा.
3. पहले हिंदी गाने की दिलचस्प है किस्सा
लता मंगेशकर ने अपने शुरुआती दिनों में अभिनय भी किया था. उन्होंने अपने पिता के मित्र मास्टर विनायक की फिल्म ‘पहली मंगलागौर’ में अभिनय किया था. इसके बाद ही लता को पहला हिंदी गाना गाने का मौका मिला. इस गाने का नाम था ‘माता एक सपूत की’. इसके बाद भी लता का संघर्ष जारी रहा. उन्होंने काम की तलाश जारी रखी जब तक उन्हें ढ़ंग का काम नहीं मिल गया.
4. आर्थिक स्थिति थी बदहाल
लता की प्रतिभा को सबसे पहले जाना था उस वक़्त के प्रसिद्ध संगीतकार मास्टर गुलाम हैदर ने. उन्होंने लता की आवाज सुनी थी और उन्हें इंडस्ट्री में लोगों तक पहुंचाने की कोशिश भी की. उस वक़्त लता बहुत कमजोर थीं. वो दौर ऐसा था जब लता की आर्थिक स्थिति बदहाल थी.
5. जब लता हुईं थी रिजेक्ट
मास्टर गुलाम हैदर और लता से जुड़ा एक किस्सा बहुत चर्चित था. फिल्ममेकर शशधर मलिक एक ‘शहीद’ नाम की फिल्म बना रहे थे. जिसमें गुलाम हैदर संगीत दे रहे थे लेकिन जब उन्होंने लता की आवाज शशधर को सुनाई तब उन्होंने उनकी आवाज को बहुत पतला बताकर रिजेक्ट कर दिया था. जिसके बाद मास्टर गुलाम को ये बात चुभ गई और उन्होंने लता को स्टार बनाने की ठान ली.
Post a Comment